Bihar: शराबकांड में घिरे मंत्री रामसूरत राय की कुर्सी खिसकने का इंतजार कर रहे हैं एनडीए के कई एमएलए

हेमंत कुमार/पटना : शराबकांड में घिरे राजस्व एवं भूमिसुधार मंत्री रामसूरत राय की कुर्सी पर कई लोगों की निगाहें लगी हुई हैं। उन्हें लग रहा है कि अगर रामसूरत की कुर्सी खिसकती है तो उनकी किस्मत चमक सकती है। शराबकांड में आरोपित रामसूरत के भगिना संजीत कुमार की अग्रिम जमानत अर्जी पर आज 18 मार्च को सुनवाई है। रामसूरत के छोटे भाई हंसलालराय उर्फ प्रकाशचंद्रलोक की अग्रिम जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। वे फरार चल रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष इस कांड में रामसूरत के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। बिहार विधानसभा के बजट सत्र में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव इस मुद्दे को गरमाये हुए हैं। ऐसे में मुजफ्फरपुर जिले से एनडीए कोटे के उन विधायकों की आंखें चमकने लगी है, जो मंत्री बनने की रेस में पिछड़ गये थे।


मुजफ्फरपुर जिले के औराई विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामसूरत नीतीश सरकार में बीजेपी कोटे से मंत्री है। नीतीश की पिछली सरकार में सुरेश शर्मा नगर विकास मंत्री थे। वे भूमिहार जाति से आते हैं। शर्मा के चुनाव हार जाने के कारण बीजेपी ने रामसूरत को मंत्री बनवा दिया। रामसूरत की जाति यादव हैं। नीतीश की नयी सरकार में मुजफ्फरपुर से मंत्री बनने की रेस में राजपूत जाति के तीन विधायक शामिल बताये जा रहे थे। इनमें पारू के अशोक सिंह और बरूराज के अरुण सिंह तो बीजेपी के विधायक हैं। तीसरे साहेबगंज के राजू सिंह वीआइपी के टिकट पर विधायक हैं। हालांकि राजू बीजेपी के ही शुभचिंतक हैं। साहेबगंज सीट वीआइपी के खाते में चले जाने के कारण राजू को मजबूरी में पार्टी बदल कर चुनाव लड़ना पड़ा था।अरुण को छोड़कर अशोक और राजू रामसूरत राय से सीनियर हैं। जानकारों का मानना है कि अगर रामसूरत मंत्री पद से हटाये जाते हैं तो इन तीनों में से कोई एक मंत्री बन सकता है।

जानिए, क्यों खतरे में हैं रामसूरत राय का मंत्री पद!

मुजफ्फरपुर जिले के बोचहा थाना क्षेत्र में जिस स्कूल परिसर से शराब की जो बड़ी खेप पकडी़ गयी थी, वह स्कूल रामसूरत राय के पिता के नाम पर और उनकी निजी जमीन पर बनी हुई है। अर्जुन राय मेमोरियल स्कूल परिसर में बोचहा थाने की पुलिस ने सात-आठ नवंबर की आधी रात को छापेमारी की थी। यानी विधानसभा चुनाव का आखिरी चरण संपन्न होने ठीक बाद। मुजफ्फरपुर जिले में दो चरणों में तीन और सात नवंबर को वोट डाले गये थे। औराई जहां से रामसूरत विधायक हैं,वहां सात नवंबर को चुनाव हुआ था।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि शराब की जो बड़ी खेप पकडी़ गयी थी, वह चुनाव में बांटने के लिए ही मंगवाई गयी थी। जिस स्कूल परिसर से शराब और शराब लदी गाडियां जब्त हुई, उससे रामसूरत राय का कनेक्शन जुड़ता है, ऐसा पुलिस का मानना है। हालांकि रामसूरत का दावा है कि उनके पिता के नाम पर चलने वाले स्कूल और सगे भाई हंसलाल राय से उनका कोई संबंध नहीं है। लेकिन जानकारों का कहना है कि रामसूरत अपनी नैतिक जिम्मेवारी से बच नहीं सकते। राजनीति में हमेशा सिद्धांत की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी भारी दबाव में बताये जा रहे हैं। वे कभी भी कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं!

एफआइआर में शराबकांड की कहानी

अर्जुन मेमोरियल स्कूल में छापेमारी में करीब आठ हजार लीटर (7606.125 लीटर) अंगरेजी शराब जब्त की गयी थी। एक ट्रक, तीन पिक अप वैन, एक डिजायर कार और एक बाइक भी पकडी़ गयी थी। शराब की बरामदगी की एफआईआर ( 298/20) बोचहां के थानेदार राकेश रंजन ने खुद के बयान पर दर्ज की थी। अमरेंद्र कुमार, दिलीप कुमार और नजराना ख़ातून मौके से पकड़े गये थे। रामसूरत राय के भाई हंसलाल राय और भगिना संजीत कुमार समेत कुल बारह लोग इस कांड में आरोपित हैं। हंसलाल की अग्रिम जमानत अर्जी 28 जनवरी,2020 को खारिज हो चुकी है। संजीत की अर्जी पर आज 18 मार्च को सुनवाई होनी है।

देखिये FIR की पूरी कॉपी