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कानपुर : अल्पसंख्यक कल्याणकारी योजनाओं के विभागाध्यक्षों के विभागों के एकतरफा मनोनयन के सम्बन्ध में सीएम को सौंपा ज्ञापन

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कानपुर/ बीपी प्रतिनिधि। कानपुर के भाजपा के क्षेत्रीय सह सयोंजक सिमरन जीत सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि देश की आजादी से लेकर आज तक देश अथवा प्रदेश के बाहरी/आन्तरिक मामलो में जहाँ भी जैसी भी आवश्यकता हुई सिक्ख समाज पूर्णतः अग्रणी पंक्ति में रहा है। आजादी की लड़ाई में सिक्खों का योगदान 80% तक रहा। आजादी के पश्चात् चीन हो या पाकिस्तान जब भी बार्डर पर संकट आया, सिक्ख सदैव देश भक्ति के लिए अग्रणी रहे एवं शहीदी प्राप्त की।

कोरोना काल के विश्वव्यापी संकट में सिक्ख समाज सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर देशवासियों की सेवा में रत रहा है किन्तु विडम्बना देखिये कि अल्प संख्यकों के कल्याण के लिए लगभग 11 (ग्यारह ) इकाईयों का गठन राज्य में प्रभावी है लेकिन उसके अध्यक्ष, चेयरमैन अथवा किसी भी महत्वपूर्ण पद पर सिक्खों का प्रतिनिधितत्व कभी नहीं रहा।

प्रभावी 11 इकाईयों में से लगभग 8 इकाईयां पूर्णतः एक समाज के कल्याण के लिए क्रियाशील है जो कि द्वितीय बहुसंख्यक समाज है। जैसे सर्वे कमीशन वक्फ वक्फ विकास लिमिटेड, हज समिति, सुन्नी सेन्ट्रल बोर्ड, शिया सेन्ट्रल बोर्ड, मदरसा शिक्षा परीक्षा, वसीका कार्यालय, वक्फ न्यायाधिकरण।

उपरोक्त सभी इकाईयां द्वितीय बहुसंख्यक समाज से संदर्भित है इसलिए उसी समाज के व्यक्तियों को महत्वपूर्ण पदों पर आसीन किया जाना न्यायोचित है किन्तु वास्तविक अल्प संख्यकों के प्रतिनिधि यदि महत्वपूर्ण इकाईयों के महत्त्वपूर्ण पदों पर नहीं होगे तो वास्तविक अल्पसंख्यकों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त होना संभव प्रतीत नहीं होता है।

आपकी सरकार की नीतियों के अनुरूप वास्तविक अल्पसंख्यकों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो इसके लिए वास्तविक अल्पसंख्यकों का महत्वपूर्ण पदो पर आसीन होना वांछित है। वास्तविक अल्पसंख्यकों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो इसके लिए सम्पूर्ण अल्पसंख्यक प्रशासनिक ढांचे का पुर्नगठन करने एवं शेष चारों इकाईयों में सिक्खों को सम्मानजनक प्रतिनिधितत्व प्रदान करने की कृपा करे एवं मदरसों में जैसे धार्मिक शिक्षा के लिए आदान-प्रदान किया जाता है उसी आधार पर गुरूद्वारे के ग्रन्धी जो बच्चों को गुरमुखी शिक्षा, संगीत, हारमोनियम, तबला, सारंगी आदि) की शिक्षा प्रदान करते है, उन्हें भी सरकारी अनुदान प्रदान किया जाये।

मदरसा बोर्ड एवं संस्कृत विद्यापीठ बोर्ड की भांति पंजाबी शिक्षा बोर्ड का गठन किया जाये जिसके अर्न्तगत प्रदेश में प्राथमिक पाठशालायें खोलकर अन्य विषयों के साथ बच्चो को गुरमुखी शिक्षा एवं धार्मिक शिक्षा प्रदान कर पंजाबी संस्कृति का संरक्षण किया जा सके।

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