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बिहार में कोरोना की तीसरी लहर में भी नहीं दिख रहे नेताजी, तेजस्वी, कन्हैया और चिराग फिर गायब!

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स्टेट डेस्क: बिहार में कोरोना की तीसरी लहर में आम लोगों के साथ कई राजनेता चपेट में आ चुके हैं। इसके बावजूद पिछले साल ‘कोरोना पॉलिटिक्स’ खूब हुई थी। सत्तारुढ़ दल को छोड़ कर सभी विरोधी दलों ने सरकार के क्रियाकलाप पर सवाल उठाए थे। यहां तक की सरकार की कोशिशों को नाकाम बताया था। एक बार फिर बिहार में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सरकार अपने हिसाब से इस लहर पर काबू पाने लग चुकी है।

लेकिन, जिन राजनेताओं ने पिछली बार संक्रमण के दौरान व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए थे वो फिर से गायब हो गए हैं। तेजस्वी यादव, चिराग पासवान से लेकर कन्हैया कुमार तक कोई भी नेता बिहार में नहीं दिख रहे हैं। हालांकि, जाप सुप्रीमो पप्पू यादव सरीखे नेता गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाते दिख रहे हैं। पप्पू यादव सरकार की खामियों को उजागर कर रहे हैं।

हनीमून पीरियड में हैं तेजस्वी
9 दिसंबर को रेचल उर्फ राजश्री से शादी करने के बाद तेजस्वी यादव पूरी तरह से ‘हनीमून पीरिएड’ में हैं। हालांकि, वह कहीं बाहर तो नहीं गए हैं। लेकिन, कोरोना की इस तीसरी लहर में वो सिर्फ लोगों से अपनी शादी की बधाई ले रहे हैं। इसमें गिने चुने लोग से ही वो और उनकी पत्नी राजश्री मिल रहे हैं। कोरोना को लेकर अभी तक न तो तेजस्वी यादव ने सरकार के कामों की समीक्षा की है और न ही किसी अस्पताल का दौरा किया है। तेजस्वी यादव मात्र एक बार अपनी पत्नी और मां राबड़ी देवी से कंबल वितरण में शामिल हुए।

संसदीय क्षेत्र तक नहीं गए चिराग पासवान
अपने चाचा पशुपति पारस से धोखा खाए चिराग पासवान अपनी हक की लड़ाई के लिए पूरे बिहार में घूमते रहे। अधिकार यात्रा करके अपनी आप बीती लोगों को सुनाते रहे। सरकार पर हमला बोलते रहे। कोरोना काल में सरकार की विफलताओं का जिक्र भी करते रहे। लेकिन, कोरोना की तीसरी लहर में उनको बिहार की याद नहीं आई। कोरोना काल में बिहार में मिनी लॉकडाउन है लेकिन चिराग पासवान अपने संसदीय क्षेत्र तक नहीं गए। हां, इतना जरूर है कि शनिवार को हाजीपुर में एक पीड़ित दलित परिवार से मिले जरूर गए। लेकिन, कोरोना को लेकर एक शब्द भी लोगों के लिए कुछ नहीं बोला और हाजीपुर से सीधे पटना आ गए।

तीनों लहर में कहीं नहीं दिखे कन्हैया कुमार
लेफ्ट से कांग्रेस में लिफ्ट करने वाले कन्हैया कुमार अपनी वाकपटूता कते लिए जाने जाते हैं। यूं तो वो बिहार के नेता हैं। बिहारी अंदाज में वो अपने विरोधी नेताओं धूल चटा देते हैं। 2019 में बिहार के बेगूसराय से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उन्होंने बिहार के लोगों की कभी सुध नहीं ली। कोरोना पहले, दूसरे और तीसरे लहर में भी कन्हैया कुमार कहीं नहीं दिखे। यहां तक की इन दो साल में उन्होंने पार्टी बदल ली। लेकिन कभी बिहार के लोगों के बारे में कुछ न बोला और न किया।

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