PANCHAYAT ELECTION: और किंगमेकर सास की गणित के आगे झुक ही गई नेता बहू !

कानपुर/ विकास बाजपेयी: 99 साल की हमारी सास ने जब कह दिया कि बहुरिया परिवार पहले है और प्रधानी की नेतागिरी बाद में तो लानत है, ऐसी प्रधानी मा, सास के समझावे से परिवार मा फिर से खुशी आ गई, भगवान ऐसी सास सबका दे” ये कहना है सरसौल ब्लॉक के खरौटी गांव की पूर्व प्रधान सीमा तिवारी का जिन्होंने 99 साल की अपनी बूढ़ी सास विद्यावती के समझाने के बाद जेठानी सुधा तिवारी के खिलाफ प्रधानी का नामांकन वापस ले लिया और अब पूरा परिवार सास की चाणक्य बुद्धि से फिर से प्रधानी के चुनाव में एकजुट हो गया है।


उत्तर प्रदेश में हो रहे पंचायत चुनाव में संबंधों के अजब गजब रंग और कारनामे दिख रहे है। प्रधानी और पंचायत के चुनाव का भूत लोगों के सर पर इस कदर हावी है कि लोग संबंधों को भी ताक पर रख कर चुनाव समर में कूद पड़े है। नेतागिरी और कुर्सी की हनक का करिश्मा लोगों पर इस कदर हावी है कि भाई बड़े भाई के खिलाफ मैदान में है तो सास बहू के और देवरानी जेठानी के खिलाफ चुनाव मैदान में है। हालांकि घर के बड़े बुजुर्ग भी संबंधों के इस खीचतान को सुधारने के लिए आगे आ रहे हैं।

सास विद्यावती के साथ सीमा तिवारी पूर्व प्रधान खरौंटी

प्रधानी के चुनाव की घोषणा के बाद लगभग टूट की कगार पर खड़े खरौटी के तिवारी परिवार की 99 वर्षीय सास भी आजकल शहर में चर्चा का विषय हैं।
शहर के सरसौल ब्लॉक के खरौटी गांव के प्रतिष्ठित तिवारी परिवार की बड़ी बहू सुधा तिवारी गांव के प्रधान पद की प्रत्याशी है तो परिवार की छोटी बहू सीमा तिवारी भी चुनाव मैदान में शामिल हो गई और प्रधान का पद उनके हाथ से फिसल न जाए इसलिए सीमा ने अपनी लड़की सुरभि का भी इसी पद के लिए नामांकन करा दिया था।

जेठानी सुधा तिवारी

नामांकन के बाद से एक साथ उठने बैठने और खाने पीने वाले इस परिवार में आपस मे बातचीत तक बंद हो गई थी। हालांकि घर की ये हालात 99 साल की बूढ़ी सास विद्यावती को बर्दास्त नहीं हो रही थी और नाम वापसी के एक दिन पहले सास ने अपनी बुद्धिमत्ता से मामले को सुलझा लिया और परिवार को टूट से बचा लिया। टूटीफूटी आवाज में विद्यावती कहती है ” बच्चा चुनाव तो हर 5 साल में आवत है लेकिन जो परिवार बिखर जाइ तो सब खतम, एही के खातिर हमका कड़ाई से बात करि के मामले का निपटावे का पड़ा” इस पूरे मामले में सीमा ने भी धैर्य से काम लिया। सीमा के जेठ राजेश कहते है कि घर मे बड़ो का सम्मान रह गया और परिवार भी नहीं टूटा। खुशी से सराबोर राजेश कहते है कि पहले खरौटी गांव के प्रधान पद के लिए चुनौती परिवार के बीच थी लेकिन सीमा और सुरभि के नाम वापसी के बाद मुकाबला एक तरफा हो गया है।

सीमा तिवारी ने हालांकि नामांकन वापस ले लिया है लेकिन तिवारी परिवार उनके अनुभव का लाभ जरूर उठाएगा। ऐसा गांव के रहने वाले कई लोगों का मानना है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि सीमा तिवारी 2010 से 2015 तक खरौटी की ग्राम प्रधान रही है और उनकी गांव के कई घरों में पैठ है हालांकि 2015 में खरौटी गांव पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गया था। इसलिए सीमा को इस पद को छोड़ना पड़ा था। सीमा कहती है कि सास की उम्र 99 साल की हो गई है और इस समय उनकी बात की न कदरी सहीं नहीं लगी तो उन्होंने और उनकी बेटी सुरभि ने जिठानी के खिलाफ अपना नामांकन वापस लेना उचित समझा।