पीएम मोदी ने पूछा-पशुओं वाली सूई तो नहीं, नेताओं की खाल होती है मोटी

-एम्स में टीका लगवाने वक्त नर्सों से हंसी-मजाक की व चुटकुले भी सुनाए

सेंट्रल डेस्क/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार सुबह एम्स में कोविड-19 का टीका लगवाने के दौरान न केवल सहज रहे, बल्कि माहौल को विनोदपूर्ण भी बनाए रखा। टीका लगा रही नर्सों का नाम-पता पूछा। साथ ही नेताओं की मोटी चमड़ी व जानवरों वाली मोटी सुई को लेकर हास्य-विनोद भी किया।

टीकाकरण के बाद बाहर निकलते हुए उन्होंने केरल की भाषा में वणक्कम (नमस्कार) भी किया। क्योंकि सूई लगाने वाली नर्स केरल की रहने वाली थी।टीकाकरण कक्ष में मौजूद नर्सों से प्रधानमंत्री ने मजाक में पूछा कि कहीं उनका इरादा मोटी सुई लगाने का तो नहीं है, क्योंकि नेताओं के बारे में कहा जाता है कि उनकी चमड़ी मोटी होती है। उनके यह कहने के बाद टीकाकरण कक्ष में मौजूद स्वास्थ्यकर्मी अपनी हंसी नहीं रोक सके। प्रधानमंत्री सुबह करीब 6 बजे ही पहुंचे तो स्वाभाविक था कि एम्स के स्वास्थ्यकर्मियों में अफरातफरी थी। इसका आभास होते ही पीएम मोदी ने उनसे हल्की-फुल्की बातचीत शुरू कर माहोल को हल्का कर दिया। वे नर्सों के नाम और पैतृक आवास के बारे में पूछने लगे।

सूत्रों के अनुसार माहौल को हल्का करने के लिए उन्होंने नर्सों से पूछा कि कहीं वह पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली सुई तो इस्तेमाल नहीं करने वाली हैं। नर्सों ने कहा-नहीं। हालांकि, वह प्रधानमंत्री का मजाक पहले नहीं समझ पाई थीं। प्रधानमंत्री ने फिर से यह कहते हुए कि नेताओं की चमड़ी मोटी होती है, पूछा कि कहीं उनका इरादा कोई विशेष मोटी सुई लगाने का तो नहीं है? यह सुनने के बाद नर्सों को न सिर्फ हंसी आई, बल्कि वे सहज भी हो गईं। अस्पताल से निकलने से पहले प्रधानमंत्री नर्सों के पास गए और हाथ जोड़ते हुए धन्यवाद तथा वणक्कम कहा।

इस दौरान उनके साथ मौजूद रहे एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने बताया कि कैसे पीएम नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन लगाए जाने से पहले नर्सों को सहज करने के लिए उनसे उनकी भाषा में बात की और चुटकुले भी सुनाये।

डॉ. गुलेरिया ने बताया कि प्रधानमंत्री नर्सिंग ऑफिसर्स को सहज करना चाहते थे और इसलिए उन्होंने जोक भी सुनाया। उनसे उनकी भाषाओं में बात की और यह भी पूछा कि कौन कहां से है। उससे नर्सों को सहज भाव से काम करने में सहूलियत हुई।