पूर्णिया: इंस्पेक्टर अश्वनी की हत्या ने पुलिस के सामने खड़े कर दिए कई सवाल

 – परिजनों ने कहा क्यों अन्य पुलिस कर्मियों को खरोंच तक नही आई ?
 – पोस्टमार्टम के बाद शव लेने से किया इनकार तो आईजी ने किया हस्तक्षेप।
 – परिजन कर रहे हैं पूरे मामले के उच्चस्तरीय जांच की मांग।


पूर्णिया(राजेश कुमार झा): पश्चिम बंगाल के पांजी पाड़ा में अपराधियों के शिकार हुए किशनगंज टाउन थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार का शव जब पोस्टमार्टम के बाद किशनगंज पहुंचा तो माहौल गमगीन के साथ -साथ तनावपूर्ण हो गया.किशनगंज पहुंचे अश्विनी के परिजन काफी आक्रोशित नजर आए.उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की.लगभग आधे घण्टे तक आईजी सुरेश कुमार चौधरी द्वारा मान -मनोव्वल के बाद परिजनो ने शव को स्वीकार किया और शव को लेकर पैतृक गांव जानकीनगर के लिए रवाना हुए.बिफोरप्रिन्ट से बातचीत में अश्विनी के भाई प्रवीण कुमार ने कहा कि आखिर क्यों थानाध्यक्ष शहीद हो जाते हैं और साथ मे छापेमारी दल के एक भी सदस्य को खरोंच तक नही आती है.कहा कि यह जांच का विषय है कि साथ के इंस्पेक्टर और पुलिस बल ने अपने अधिकारी को बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई क्यों नही की.

परिजनों ने छापेमारी दल के सदस्यों के क्रियाकलाप के जांच की मांग कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग किया।विधान पार्षद दिलीप जायसवाल ने अश्विनी के शव पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कहा कि इस मसले पर उनकी सीएम से बात हुई है.उनके संज्ञान में पूरा मामला है.उन्होंने कहा है कि मृतक के परिजनों को हर सम्भव मदद दी जाएगी और डीजीपी को सख्त से सख्त कार्रवाई करने को कहा है.दोपहर करीब 3.30 बजे शहीद पुलिस इंस्पेक्टर के शव को लेकर वाहनों का काफिला पैतृक गांव पहुंचा तो परिजनों के बीच चीख -पुकार मच गई.

करीब 4.30 बजे शहीद अश्विनी की पत्नी और तीनों बच्चे जब पटना से गांव पहुंचे और शव से लिपट बिलखने लगे तो लोगों के सब्र का बांध टूट गया.शाम करीब 05 बजे जिलाधिकारी राहुल कुमार और एसपी दयाशंकर ने जानकीनगर जाकर मृतक परिजनों से मिल ढाढस बंधाया.शहीद अश्विनी का अंतिम संस्कार रविवार को होगा.अश्विनी की एक बहन गोवा और दूसरी अहमदाबाद में रहती है, जिनके गांव पहुचने पर अश्विनी पंच तत्व में विलीन होंगे.बहरहाल हर दिल अजीज अश्विनी के इस तरह चले जाने को लेकर इलाके में कयासों और चर्चाओं का दौर जारी है.