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रघुवंश प्रसाद सिंह पुण्यतिथि : गणित का प्रोफेसर जो ‘तीन-पांच’ नहीं जानता था

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वह गणित से पीएचडी और प्रोफेसर भी थे लेकिन जीवन में ‘तीन-पांच’ नहीं था। ‘कैलकुलेटिव’ नहीं थे, निहायत निष्कलुष, सरल, सरोकारी और खांटी समाजवादी। वह लोक व्यक्तित्व थे और किसानी या फक्कड़ गृहस्थ मिजाज खुद में बहुत जतन से जीवन के अंत तक संजोये रखा। विचार (आइडियालजी), पार्टी और कार्यकताओं के बूते राजनीति करने वाले रघुवंश बाबू कारपोरेट पोषित और पेरोल पर जी रहे तमाम नेताओं के आगे चुनौती थे। पांच बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री रहे और मनरेगा जैसी जनोन्मुखी योजना को उनकी ही वजह से अमली जामा मिल सका। उनके ही कार्यकाल में, उनके ही प्रयास से मनरेगा क्रियान्वयन के स्तर पर अपना उल्लेखनीय मुकाम पा सका। 1973 में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सचिव थे और 1977 से 1990 तक बिहार विधानसभा के सदस्य। उसी दौरान बिहार में कर्पूरी ठाकुर की सरकार में ऊर्जा मंत्री और 1990 में विधानसभा में उपाध्यक्ष बनाए गए।

बाद में जब लालू प्रसाद की सरकार बनी तो विधान परिषद के सभापति और बाद में मंत्री बने। 2009 में रघुवंश बाबू पांचवी बार लोकसभा के लिए चुने गए। तब राष्ट्रीय जनता दल केंद्र की संप्रग सरकार में शामिल नहीं था। फिर भी सोनिया गांधी ने उनके सामने लोकसभा अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव रखा, लेकिन उन्होंने सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया कि केंद्र सरकार में उनकी पार्टी को हिस्सेदारी नहीं दी गई थी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था ‘ उनके निधन के साथ ही गांव और किसानों की एक मजबूत आवाज सदा के लिए खो गयी। गांवों और किसानों के उत्थान के लिये उनकी सेवा और लगन तथा सामाजिक न्याय के लिये उनके संघर्ष को सदा याद रखा जाएगा। कांग्रेस ने कहा है कि वह ‘बिहार के सपूत’ थे। उन्हें राजनीति में नैतिकता की वकालत के लिये हमेशा याद किया जाएगा।

रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन पर लालू प्रसाद ने ट्वीट कर कहा था- ‘प्रिय रघुवंश बाबू ! ये आपने क्या किया? मैंने परसों ही आपसे कहा था आप कहीं नहीं जा रहे हैं। लेकिन आप इतनी दूर चले गए। नि:शब्द हूं। दुःखी हूं। बहुत याद आएंगे ‘तेजस्वी यादव ने कहा था- ‘राजद के मजबूत स्तम्भ, प्रखर समाजवादी जनक्रांति पुंज हमारे अभिभावक पथ प्रदर्शक आदरणीय श्री रघुवंश बाबू के निधन से मर्माहत हूं। आप समस्त राजद परिवार के पथ प्रदर्शक, प्रेरणास्रोत व गरीब की आवाज बने रहे। आपकी कमी राजद व देश को सदैव खलेगी।

‘पंडित जी, आपकी लेखनी बहुत जोरदार है…. खास बात कि हमें भी पूरा समझ आता है और ये तो सराहते ही हैं .. फिर और किस सर्टिफिकेट की जरूरत है। (एक बार डीपी त्रिपाठी मुझे अपने साथ लेकर उनके आवास पर गए थे, तब मैं पटना दैनिक जागरण में था, रघुवंश बाबू ने उन्हीं की ओर इशारा करते कहा था) और भी तमाम यादें हैं।

सतत शोधार्थी, स्कॉलर और वरिष्ठ पत्रकार कुमार नरेंद्र सिंह कहते हैं- वह बहुत हद तक माटी पगे मौलिक और वास्तविक जन नेता थे। 2009 में दूसरी बार संप्रग की सत्ता में वापसी के तमाम कारणों में एक मनरेगा भी बहुत महत्वपूर्ण फैक्टर था। मेरी, सुविज्ञ दुबे ‘जनेवि’, लोकधर्मी पत्रकार रविशंकर तिवारी और बागी यानी बलियाटिक, चिंतक पत्रकार रवींद्र ओझा की ओर से रघुवंश बाबू को श्रद्धांजलि।

राघवेन्द्र दुबे की फेसबुक वॉल से साभार

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