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रवीश कुमार ने पूछा- राफेल मुद्दे पर सीएजी की रिपोर्ट से क्या सरकार को मिल गई है क्लीन चिट

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सेंट्रल डेस्क: पत्रकार रवीश कुमार ने राफेल सौदे पर आई सीएजी की रिपोर्ट पर व्यंगात्मक लहजे में कटाक्ष किया है. अपने ब्लॉग ‘क़स्बा‘ के माध्यम से उन्होंने सीएजी की रिपोर्ट पर चुटकी ली है. क्या लिखा है रवीश ने पढ़ें अक्षरशः उन्हीं के शब्दों में:-

आज गजब हो गया. राफेल पर सीएजी की रिपोर्ट तो आई, मगर सार्वजनिक होकर भी गोपनीय नज़र आई. अभी तक दि वायर और हिन्दी में गोपनीय रिपोर्ट सार्वजनिक हो रही थी मगर आज सार्वजनिक होकर भी रिपोर्ट के कई अंश गोपनीय नज़र आए. सीएजी ने यूरो और रुपये के आगे संख्या की जगह अंग्रेज़ी वर्णमाला के वर्म लिखे हैं.

इस तरह रिपोर्ट पढ़ते हुए आपको ये तो दिखेगा कि मिलियन और बिलियन यूरो लिखा है मगर मिलियन के आगे जो कोड इस्तेमाल किए हैं उसे पढ़ने के लिए जग्गा जासूस को हायर करना पड़ेगा. आप पेज 120 और 121 पर जाकर देखिए. राफेल विमान कितने में खरीदा गया, कितने का प्रस्ताव था इनकी जगह जो संकेत चिन्ह लिखे गए हैं, उन्हें पढ़ने के लिए आईआईटी में एडमिशन लेकर फेल होना ज़रूरी है.

जब पैसा ही नहीं बताना था तो कोई कैसे जान पाएगा कि सौदे में क्या हुआ क्या नहीं. क्या ये पहली बार हुआ है जब सीएजी ने वायुसेना की खरीद पर ऑडिट करते हुए पैसे की मात्रा नहीं बताई है, हमारे सहयोगी राजीव रंजन कहते हैं कि मार्च 2015 में सीएजी ने जब रूस से खरीदे जाने वाले विमान मिग-219 की ऑडिट की थी तब हर पैराग्राफ में पैसा लिखा था. अमरेकी डॉलर में भी लिखा था कि 740.35 मिलियन डॉलर और भारतीय रुपये में भी लिखा था 3,568 करोड़.

इसी तरह मार्च 2016 में समाप्त हुए वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट में सीएजी ने साफ-साफ लिखा है कि 24 बी ए ई हॉक एजेटी विमान की खरीद 1982 करोड़ से लेकर 1777 करोड़ लिखा है. बेशक अलग-अलग संदर्भों में दाम लिखा हुआ है, मगर सीएजी ही बताए जब मिग और हाक विमान की खरीद की ऑडिट में आप कीमत खुल कर बताते हैं तो राफेल विमान की ऑडिट में आपने कीमत क्यों नहीं बताई?

आप खुद भी सीएजी की रिपोर्ट पढ़ें. पेज नंबर 120 से पढ़ना शुरू करें. 120 से 126 तक बताया जाता है कि 15 साल तक खरीद की प्रक्रिया क्यों रद्द हुई. इसकी समीक्षा में सीएजी ने लिखा है कि हिन्दुस्तान एयरोनिटिक्स लिमिटेड को अपने यहां विमान बनाने में कितना मानव घंटा लगेगा. इसकी गिनती को लेकर विवाद हो गया.

दूसरा दास्सो एविएशन ने इस बात से इनकार कर दिया कि वह भारत में विमान बनाने का लाइसेंस तो देगा मगर 108 विमानों की गारंटी नहीं लेगा. यही नहीं सीएजी ने लिखा है कि दास्सों कंपनी से 7 श्रेणियों में कीमतों का ब्योरा मांगा गया था. उसके लिए एक फॉर्मेट बनाया गया था.

राफेल ने वायुसेना के तय किए फॉर्मेट के हिसाब से कीमतों का ब्योरा देने से मना कर दिया. सीएजी की रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र नहीं है कि जब राफेल ने तय फॉर्मेट के हिसाब से कीमतों का ब्यौरा नहीं दिया तो उससे बातचीत क्यों होती रही.

मार्च 2015 में राफेल विमान के लिए बनी कमेटी ने अपना रिक्वेस्ट ऑफ प्रपोज़ल वापस ले लिया और 126 राफेल फाइटर विमान के लिए 15 साल से चली आ रही बातचीत रद्द कर दी. उसके चंद दिनों बाद 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में एलान होता है फ्रांस और भारत के बीच समझौता होगा.

अब यहां सीएजी की रिपोर्ट में यह नहीं बताया जाता है कि कोई महीने भर से भी कम समय में वो कौन सी प्रक्रिया थी, किन प्रक्रिया के तहत पेरिस में एलान से पहले होमवर्क होता है. उसमें कौन सी कमेटी शामिल है. क्या दो सरकारों के बीच बिना होमवर्क या किसी प्रक्रिया के हो सकता है, हम इस सवाल पर बात करेंगे. सीएजी की रिपोर्ट में सिर्फ इतना लिखा है कि अलग से प्रक्रिया चल रही थी कि दास्सों एविएशन से बेहतर शर्तों पर खरीद होगी.

वो प्रक्रिया क्या थी, इसका ज़िक्र नहीं मिला. पेरिस में डील के एलान के बाद 12 मई 2015 को इंडियन निगोशिएटिंग टीम का गठन होता है. इसी टीम के तीन सदस्यों के एतराज़ की रिपोर्ट हिन्दू में आई थी. सीएजी की रिपोर्ट में इस टीम के ऐतराज़ का कोई ज़िक्र नहीं है.

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