33वीं पुण्यतिथि पर याद किए गए क्रांतिकारी कवि शक्र, कहा था मुझे मालूम है मैं खंजरों पर चल रहा हूं…

सिमरिया धाम/बेगूसराय (प्रतिनिधि): मुझे मालूम है मैं खंजरों पर चल रहा हूँ, उजाला मार्ग में करने स्वयं मैं बल रहा हूँ…के रचयिता क्रांतिकारी कवि कविवर रामावतार यादव शक्र की 33वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को उनके पैतृक गांव सिमरिया दो पंचायत के रूपनगर में पंचायतवासियो व शक्र प्रेमियों द्वारा समारोह आयोजित की गई।


कलम के मजदूर नाम से मशहूर कविवर रामावतार यादव शक्र के पुण्यतिथि के अवसर पर रूपनगर गांव स्थित स्मारक पर पहुंचकर लोगों ने उनके प्रतिमा पर माल्यर्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कविवर शक्र जन्मशताब्दी समिति के अध्यक्ष रामानंद प्रसाद यादव ने कहा कि कविवर शक्र के जन्मशताब्दी समारोह में समिति ने मुख्य रूप से पांच कार्य करने का निर्णय लिया था।

उसमें से शक्र के पैतृक गांव रूपनगर में उनका प्रतिमा लगाने व शक्र के नाम से पुस्तकालय भवन बनाने का कार्य समिति के देखरेख में संपन हो चुका है। अब शक्र के पांडुलिपि को प्रकाशन करवाने व उनके नाम पर पंचायत में हाई स्कूल खोलने के लिए समिति प्रयासरत है। वही मल्हीपुर चौक पर शक्र द्वार का निर्माण करने का निर्णय लिया गया है।

तेघरा विधायक के सहयोग से जल्द ही शक्र द्वार का निर्माण का शिलान्यास किया जाएगा। शक्र स्मृति विकास के अध्यक्ष उदयकांत यादव ने बताया कि कविवर शक्र हमेशा गरीब, किसान व मजदूर के लिए हमेशा लिखते रहे, वे अपने जीवन के कठिन दौड़ में भी किसी से समझौता नहीं किया।

पूर्व मुखिया रामानुज राय ने शक्र की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1 फरवरी 1915 में रूपनगर में एक गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद उनका निधन 10 जून 1988 को हो गया था। इस मौके पर पूर्व पंसस वकील रजक, गंगाधर पासवान, अनिल यादव, अशोक पासवान, राजद के प्रखंड सचिव जितेंद्र ठाकुर, कविवर शक्र के पौत्र कृष्ण नंदन यादव, युवा कवि श्याम नंदन निशाकर, वार्ड सदस्य संजीव कुमार, सुमित माही, बिकेश कुमार, अंकित कुमार समेत कई अन्य लोग मौजूद थे।