शिवसेना फिर हुई हमलावर, बीजेपी को लगता है राहुल गाँधी से डर: सामना

सेंट्रल डेस्क: शिवसेना लगातार अपने मुख्यपत्र “सामना” के माध्यम से मोदी सरकार पर निशाना साधती रहती है। कभी किसान बिल को लेकर तो कभी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करती है। ऐसा ही ताज़ा मामला आया है। सामना के लेख में राहुल गाँधी की तारीफ हुई तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल।



शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में राहुल गांधी की तारीफ़ की गई है और साथ ही साथ केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा गया है। सामना में सवाल खड़े किये गए है कि मोदी सरकार केंद्रीय जाँच एजेंसी का दुरूपयोग कर रही है। लेख में लिखा है कि केंद्रीय जाँच एजेंसी का गलत उपयोग करके गांधी परिवार को सताना ठीक नहीं है।

दिल्ली के सत्ताधारियों को राहुल गांधी से डर लगता है तभी वह ऐसे कार्य कर रहे है। मुखपत्र सामना में हाल ही में आयकर विभाग की रॉबर्ट वाड्रा से हुई पूछताछ को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

राहुल गांधी की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि, लड़ाका भले अकेले रहे पर उससे तानाशाह को डर लगता है और अकेला योद्धा प्रामाणिक होगा तो डर सौ गुना बढ़ जाता है। ऐसे ही राहुल गांधी का डर सौ गुना वाला है। सामना के संपादकीय लेख में लिखा गया है कि राहुल गांधी एक बार फिर से कांग्रेस के अध्यक्ष पद को ग्रहण करने वाले हैं।

यह सच है की बीजेपी प्रधानमंत्री मोदी के अलावा और कोई विकल्प नहीं है और कांग्रेस के पास गांधी के बिना कोई विकल्प मौजूद नहीं है। यह सच स्वीकार करना होगा। सामना खा गया है की राहुल गाँधी के खिलाफ कमज़ोर नेता की छवि का प्रचार किया गया। इन सब के बाद भी राहुल गांधी अब भी खड़े हैं और लगातार मोदी सरकार पर हमला कर रहे हैं।

दिल्ली में बैठे सत्ताधारियों को राहुल गांधी का डर सताता है। अगर ऐसा नहीं होता तो गांधी परिवार की बदनामी की सरकारी मुहिम न चलायी जा रही होती। इस लेख से उन्होंने प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के घर आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। सामना में यह कहा गया है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद को स्वीकार करने के लिए हाँ कर दिया है। बीजेपी सदैव गांधी परिवार को लेकर हमलावर रहती है।

शिवसेना के मुखपत्र सामना में बीजेपी पर हमला करते हुए लिखा गया है कि करोना की वैक्सीन तो वैज्ञानिकों ने ढूँढ ली। अगर एक वैक्सीन राजनीतिक पेट दर्द और बदले की बीमारी के लिए भी बनायी गयी होती तो कितना अच्छा होता। यही नहीं सामना में पीएम मोदी पर भी सवाल खड़े किये गए।

संपादकीय लेख में लिखा है कि विदेश से काला धन वापसी की बात तो प्रधानमंत्री मोदी ने ही की है और अब जबकि यही काला धन रखने वालों ने पीएम केयर फंड में कमाई मुफ़्त में दान करके ख़ुद का पैसा सफ़ेद कर लिया है। इसकी जाँच कौन से अदालत में होगी ? विरोधी दल से मतभेद होते हैं लेकिन विरोधी दल का और उसकी नीति का गला दबा कर शव को दिल्ली के विजय चौक पर लटकाने की नीति धक्का दायक ही है।