Sitamarhi: फसल में आग लगाने को मजबूर गन्ना किसान, मिलों पर बकाया है करीब 125 करोड़ रुपया

-रीगा शुगर मिल न चालू होने के कारण खेतो में बर्बाद हो रही गन्ने की फसल
-निर्धारित समय के एक माह बाद भी चालू हुई पेराई



सीतामढ़ी/ रवि शंकर: जिले की एकमात्र औद्योगिक इकाई रीगा शुगर मिल प्रबंधन और हुक्मरानों की लापरवाह कार्यशैली के कारण गन्ना किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। चुनावी सभाओं में किसानों का सच्चा हितैषी होने का दंभ भरने वाले जनप्रतिनिधियों को भी गन्ना किसानों की समस्या से कोई लेना – देना नहीं रह गया है।

हाल ही में मिल के सीएमडी ओपी धानुका ने मिल नहीं चलाने की बात कहकर जिले के गन्ना किसानों को भारी मुश्किल में डाल दिया है। वही पिछले सीजन से लेकर अब तक किसानों का मील प्रबंधन पर करीब सवा सौ करोड़ रुपये बकाया है। वही इस बार करीब 7 से 8 एकड़ में कई गई गन्ना की फसल खेतो में ही बर्बाद हो गई है। मरता क्या नही करता, अब हालात ये है कि खुद भूखमरी का शिकार हो रहे गन्ना किसान अब अपने गन्ना में आग लगाने को मजबूर है।

रीगा प्रखंड के फतहपुर निवासी गन्ना किसान कृष्ण कुमार का कहना है कि लगभग पौने 6 एकड़ में गन्ना है। मिल बन्द रहने के कारण बड़ी मुश्किल हो रहा है। वही चैनपुरा का किसान रामप्रीत का कहना है कि पिछले दो साल के गन्ना का मूल्य करीब साढ़े 3 लाख मिल पर बकाया है। बीते तीन साल का गन्ना मूल्य अब तक मिल ने भुगतान नहीं किया है। पिछले साल चार टायर गन्ना मिल को दिया, परंतु अब तक भुगतान नहीं मिला है। इस साल थोड़ा गन्ना था जिसे किसी प्रकार पेराई करा खेत खाली किया है।

पिछले एक दशक से मिल प्रबन्धन की मनमानी कार्यशैली के कारण गन्ना किसानों को परेशानी झेलने की मज़बूरी बनी है। बताया जाता है कि जिले के करीब 30 हजार गन्ना किसानों का तकरीबन 14 लाख क्विंटल गन्ना अब तक खेतों में लगा है। मिल चालू नहीं होने और क्रशर उपलब्ध नहीं होने के कारण गन्ना कि कटाई नहीं हो रही है। वही खेत खाली नहीं होने के कारण किसानों को अगली फसल लगाने मे भारी परेशानी हो रही है।

संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के डॉ आनंद किशोर का कहना है कि सरकार को मिल चालू कराने की दिशा में पहल करनी चाहिए। गन्ना किसानों का पिछला बकाया का भुगतान कराने को लेकर सरकारी व प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम अविलंब उठाए जाने की जरूरत है। अगर मिल चालू नहीं हुआ तो हजारों किसान आर्थिक बर्बादी का शिकार हो जाएंगे। गन्ना किसानों के हित मे मिल प्रबंधन को समस्या निदान का प्रयास करना चाहिए। पेराई का समय नवंबर निर्धारित है, जबकि दिसंबर बीतने जा रहा है ।ईख उत्पादक संघ, रीगा के अध्यक्ष नागेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि मिल प्रबंधन पर किसानों का करीबन सबा सौ करोड़ रुपये बकाया, उन्होंने बताया कि पिछले सीजन का 65 करोड़ और मील द्वारा बैंक के द्वारा किसानों का 70 करोड़ के लगभग में केसीसी करवा दिया गया था। जिसकी वापसी को लेकर बैंक प्रबंधन किसानों पर दवाब डाले हुआ है।

बतादे की आजादी से करीब एक दशक पूर्व जिले के रीगा प्रखंड मुख्यालय में रीगा सुगर कंपनी की स्थापना की गई। तब जिले में गन्ना की खेती बहुत कम हुआ करती थी। परन्तु बाद में मिल की पहल पर किसानों ने गन्ना की खेती व्यापक स्तर पर करना शुरू कर दिया। सरकारी नियम का हवाला देते हुए ग्रामीण क्षेत्रो मे क्रशर चला कर गन्ना पेराई पर प्रतिबंध लगा दिया गया। नतीजतन गन्ना किसान मिल को ही गन्ना देने को विवश होने लगे।