मधुबनी कांड के पीड़ित परिवारों से तेजस्वी ने की मुलाकात, 5-5 लाख रुपए की आर्थिक मदद

स्टेट डेस्क: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज मधुबनी नरसंहार पीड़ितों से मुलाक़ात में उनका दुःख-दर्द साँझा कर 5-5 लाख रुपए की आर्थिक मदद की। यह नरसंहार पूर्ण रूप से सत्ता संरक्षित और प्रायोजित है।

इस नरसंहार में नामज़द एक भी अभियुक्त की अभी तक गिरफ़्तारी क्यों नहीं हुई है? जघन्य नरसंहार के एक हफ़्ते बाद भी पुलिस प्रशासन और सरकार सोई हुई है। पुलिस दोषियों को गिरफ़्तार करने की बजाय उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचा रही है।

प्रदेश का दुर्भाग्य है कि ऐसी दर्दनाक घटना के बाद भी मुख्यमंत्री जी को घटना के बारे में पता ही नहीं होता। उन्होंने इस भयानक नरसंहार पर कोई शोक संवेदना और खेद तक प्रकट नहीं किया।

सत्ता संरक्षण में हुए इस नरसंहार में अगर किसी विधायक, मंत्री तथा उनकी किसी सेना की कोई संलिप्तता नहीं है तो मुख्यमंत्री किसी उच्च अधिकारी के नेतृत्व में SIT का गठन क्यों नहीं करते? मुख्यमंत्री को अविलंब SIT का गठन करना चाहिए।

अपराधी का कोई जाति-धर्म नहीं होता। जो व्यक्ति ऐसे क्रूर काम करे, मानवता और इंसानियत में यक़ीन ही ना करे उसके लिए कोई जाति-धर्म मायने नहीं रखता। जो अपराधी रावण के नाम पर सेना चलाता हो उससे उसकी मानसिकता का पता चलता है।

रावण तो बुराई का प्रतीक है। फिर बुराई के प्रतीक को मानने वाली की क्या जाति होगी? ऐसे अपराधी को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए।

मुख्यमंत्री जी बताए, जब प्रदेश में ऐसी सेना का संचालन हो रहा है तो उनकी पुलिस और तंत्र क्या काम कर रहा है?

मैंने पहले ही कहा था, नीतीश जी से बिहार नहीं संभल रहा। वो थक चुके है और अब हार कर अपमानित होकर भी मुख्यमंत्री बने हुए है। चलो लोकलाज और नैतिकता त्याग अनुकंपा पर मुख्यमंत्री बन ही गए तो अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन किजीए।

सुशासनी अपराधी बेलगाम है। पुलिस बेक़ाबू है। पुलिस और अपराधियों की साँठगाँठ है। और मुख्यमंत्री असहाय हो कह रहे है यह मेरी ज़िम्मेवारी नहीं पुलिस की है। मैं नहीं पुलिस इसे देखेगी।

मुख्यमंत्री जी, आपका एसपी से क्या विशेष प्रेम है? जाँचकर्ता डीएसपी तो मुख्य अभियुक्त का मार्गदर्शक है, उससे आप क्या जाँच करवा रहे है? अभी तक एसपी-डीएम ने घटनास्थल का दौरा तक नहीं किया है और आप कह रहे है कि न्याय होगा? आपके शब्दकोष में न्याय दोषियों को मिलता है पीड़ितों को नहीं। बिहार की जनता आपकी सरकार और गृह विभाग के सारे कृत्य देख रही है।