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भभुआ में पदस्थापित दरोगा की कोरोना से हुई मौत, ग्रामीणों ने शव को दफ़नाने से रोका

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कैमूर: बिहार के कैमूर जिले के भभुआ थाना में पदस्थापित दरोगा की मोहनिया स्थित घर पर कोरोना से मौत हो गई. लेकिन यहां एक शर्मनाक वाकया हुआ. जिस कोरोना योद्धा ने अपनी ड्यूटी के समय इलाके के लोगों की सेवा की उन्हीं लोगों ने उनके शव को दफन नहीं होने दिया.

अंतिम संस्कार के लिए शव को लेकर मोहनिया प्रखंड के रतवारा नदी पर पहुंचे स्वास्थ्य कर्मियों को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. ग्रामीण हाथों में लाठी डंडे लेकर नदी के पास शव दफनाने से मना करने लगे. आखिर ग्रामीणों ने स्वास्थ्य कर्मी को शव के साथ खदेड़ दिया.

मृतक दरोगा डेढ़ माह में रिटायर होने वाले थे. उन्हें सांस लेने में परेशानी थी और सर्दी बुखार की शिकायत थी. जिसके बाद उनके बेटे द्वारा अनुमंडल अस्पताल मोहनिया में कोरोना जांच कराया गया था, तीन दिन पहले इनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. जिस दरोगा ने कोरोना काल में अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों के जान बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी.

मृतक दरोगा के बेटे बताते हैं कोरोना काल में मेरे पापा ने बहुत ज्यादा सेवा किया, लेकिन उनके मरने के बाद मेरे ही शहर के ग्रामीणों द्वारा उनको दफनाने नहीं दिया जा रहा है. मैं भी विकलांग हूं काफी परेशानी हो रही है.

मोहनिया के सर्किल इंस्पेक्टर बताते हैं ग्रामीण विरोध कर रहे हैं. हम लोग वरीय पदाधिकारियों से बात कर मार्गदर्शन ले रहे हैं.

दरोगा के मौत की सूचना मिलते ही कैमूर एसपी दिलनवाज अहमद पीड़ित परिवार के घर वालों से मिलने के लिए पहुंचे. जहां शव को दफनाने से लेकर सारी सुविधाएं मिलने तक आश्वासन दिया.

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