दिल्ली पुलिस का ‘टूलकिट एफआईआर’ मोदी राज के दमन, दण्ड और लोकतंत्र का गला दबाने की टूलकिट है

सेंट्रल डेस्क: भाकपा माले ने कहा है कि दिल्ली पुलिस द्वारा की गई ‘टूलकिट एफआईआर’ दमन, दण्ड और लोकतंत्र की हत्या करने की मोदी सरकार की टूलकिट है. जिस टूलकिट की चर्चा हो रही है और जिसके कारण एफआईआर दर्ज की गई है वह दरअसल समर्थन करने के लिए बनाया गया एक सार्वजनिक दस्तावेज है जिसमें आम लोगों को किसान आन्दोलन के प्रमुख मुद्दों की जानकारी देते हुए हैशटैग, वीडियो और प्रदर्शन आदि कैसे किये जायें यह बताया गया है. ऐसी गतिविधियां लोकतांत्रिक विरोध के मूलभूत तत्व होते हैं और इनको अपराध बता कर मोदी सरकार ने अपने तानाशाही चरित्र को उजागर कर दिया है.



माले की सेंट्रल कमिटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत के गृहमंत्री के तहत काम करने वाली दिल्ली पुलिस बंगलूरु में पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि के घर में जबरन घुस कर और फिर बंगलूरु से दिल्ली लाकर खुलेआम कानून तोड़ा है और कानूनी व संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है. अगर मोदी सरकार का गृह मंत्रालय एक महत्वहीन एफआईआर को हथियार बना कर भारत के किसी भी हिस्से से नागरिकों को गिरफ्तार कर सकता है, तो निश्चित ही यह संघीय ढांचे और लोकतंत्र पर बहुत बड़ा हमला है. यह और भी शर्मनाक है कि कर्नाटक की भाजपा सरकार उस राज्य के लोगों के अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रताओं को ताक पर रख कर दिल्ली पुलिस व केन्द्र सरकार के साथ मिल गई.

पार्टी ने कहा कि हम मांग करते हैं कि दिशा रवि, निकिता जैकब और अन्य पर्यावरण आंदोलन के कार्यकार्ताओं पर लगाये गये मुकदमे तत्काल वापस लिये जायें और सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाये.

मोदी सरकार इन युवा पर्यावरण कार्यकर्ताओं को दुश्मन के रूप में देख रही है क्योंकि पर्यावरण नियमन को कमजोर बना कर अडानी व अम्बानी जैसे क्रोनी पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की नीति को वे निरंतर सफलतापूर्वक चुनौती देते रहे हैं.

अहिंसात्मक विरोध और नागरिक अवज्ञा की भावना का अपराधीकरण हरगिज नहीं होना चाहिए. व्यवस्थित तरीके से चल रहे घृणा व हिंसा फैलाने के अभियानों पर आपराधिक कार्यवाही होनी चाहिए.

हम मांग करते हैं कि दिल्ली पुलिस बताये कि कपिल मिश्रा और अभाविप नेता कोमल शर्मा, जिन्होंने सचमुच हिंसा भड़काई और उसकी अगुवाई की, को अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है? कपिल मिश्रा द्वारा सोशल मीडिया पर चलाई जा रही नफरत की फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही? दिल्ली पुलिस भारत के संविधान के प्रति जबावदेह है और ‘हम भारत के लोगों’ को उसे यह जबाव देना चाहिये.