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टिकट बंटने से पहले वैशाली में खिलेंगे कई गुल, एनडीए में मचा है ‘मौन घमासान’!

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हेमंत कुमार/पटना:टिकट बंटने से पहले वैशाली में कई गुल खिलेंगे! टिकट को लेकर एनडीए के भीतर ‘मौन घमासान’ मचता दिख रहा है।वीणा देवी, बसावन भगत और विजय सहनी मैदान में उतर चुके हैं।तीनों अपने को टिकट का प्रबल दावेदार बता रहे हैं।मजेदार बात यह है इस क्षेत्र के एमपी रामाकिशोर सिंह या उनकी पार्टी ,लोजपा की ओर से कोई कुछ नहीं बोल रहा है।

एनडीए से टिकट की प्रबल दावेदार मानी जा रही बीजेपी की पूर्व विधायक वीणा देवी और उनके पति जदयू एमएलसी दिनेश सिंह की ओर से शुक्रवार को सरैया में जनप्रतिनिधि मिलन समारोह हुआ।वीणा देवी लोजपा का टिकट चाह रही हैं।इसके पीछे का गणित यह है कि वैशाली लोजपा की जीती हुई सीट है,लिहाजा यह सीट उसी के खाते में रहेगी।

लोजपा का उम्मीदवार कौन होगा, यह तय नहीं है।चर्चा है कि रामविलास और चिराग की नाराजगी के कारण रामाकिशोर सिंह का टिकट कटने जा रहा है।ऐसे में दिनेश सिंह की पत्नी वीणा देवी को लोजपा का टिकट मिल सकता है! लेकिन वैशाली में एनडीए के उम्मीदवार का गणित जितना सरल दिख रहा है, हकीकत में उतना है नहीं!

दरअसल टिकट हासिल करने से पहले एनडीए के तीनों नेता अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। सरैया में वीणा देवी के ‘शक्ति प्रदर्शन’ के बाद विजय सहनी ताकत दिखाने जा रहे हैं। विजय सहनी की ओर से जीवछ कॉलेज ,मोतीपुर में 17 फरवरी को कार्यकर्ता सम्मेलन होने जा रहा है।सहनी पिछले लोकसभा चुनाव में वैशाली संसदीय सीट पर जदयू के उम्मीदवार थे।उनको करीब डेढ लाख वोट मिले थे और वह तीसरे स्थान पर थे। वीणा और विजय के अलावा बीजेपी के बसावन प्रसाद भगत भी टिकट के दावेदार बताये जा रहे हैं।भगत लालू सरकार में मंत्री और कुढनी से विधायक रह चुके हैं।

चार दिन पहले भगत और उनकी पत्नी ललिता देवी ने बीजेपी महिला मोर्चा के बैनर तले भगवानपुर रत्ती में महिलाओं की बड़ी रैली आयोजित की थी।रैली में बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया राहटकर और बीजेपी, बिहार के अध्यक्ष नित्यानंद राय समेत कई बड़े नेताओं ने शिरकत की थी।वह कार्यक्रम बसावन का ‘शक्ति प्रदर्शन’ माना गया था!


वीणा और दिनेश की ओर से सरैया में आयोजित ‘मिलन समारोह’ की तैयारी जिस स्तर पर की गयी थी, उसकी तुलना में लोग कम जुटे।मंच भरा हुआ था, लेकिन मंच के सामने की कुर्सियां खाली थीं।एक स्थानीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दिनेश और वीणा को दूसरों से नहीं , बल्कि ‘अपनों’ से खतरा है।यही वजह है कि जबरदस्त तैयारी के बाद भी भीड़ नहीं जुटी!

दूसरे शब्दों में कहे तो भीड़ को जुटने से रोका गया! लोगों को आने से किसने रोका? यह दिनेश और वीणा को पता है।असली बात यह है कि वे उससे कैसे निबटेंगे! यानी भितरघात अभी से शुरू हो गया है। आगे देखिए, क्या-क्या गुल खिलने वाला है।


दिनेश सिंह ने अपनी पत्नी की दावेदारी के पक्ष में दो बातें कहीं! पहली बात यह कि मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी सहमति दी है! दूसरी बात यह कि वीणा जीतेंगी तो रामविलास पासवान और नीतीश कुमार का हाथ मजबूत होगा! कभी केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह के शागिर्द रहे दिनेश सिंह ने उनपर तंज कसते हुए कहा, जिनके तमाम चुनावों में मैं एलेक्शन एजेंट होता था, अब अगर वह मुझमें खराबी गिना रहे हैं, तो लोगों को पूछना चाहिए कि बीस सालों तक उन्हें मेरी खराबी क्यों नजर नहीं आयी!


दिनेश और वीणा की दावेदारी पर पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू के उम्मीदवार रहे , विजय सहनी ने beforeprint.in से बातचीत में कहा, हमारी दावेदारी कायम है। अभी किसी का टिकट तय नहीं हुआ है। जदयू के बैनर तले मेरी ओर से 17 फरवरी को सम्मेलन होने जा रहा है।प्रदेश पार्टी अध्यक्ष की सहमति से मैं यह कार्यक्रम करने जा रहा हूं! मैं टिकट की रेस में शामिल हूं! कोई मुझे कमजोर समझने की भूल न करे!


बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री बसावन भगत ने अपनी दावेदारी को मजबूत बताते हुए कहा, मैं पिछले एक साल से क्षेत्र मे पार्टी का आधार बढाने में जुटा हुआ हूं। नये राजनीतिक हालात में इस सीट पर मेरी दावेदारी सबसे मजबूत है! मैंने पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी दावेदारी पेश कर दी है।


जाहिर है विजय और बसावन के मैदान में कूद पड़ने से एनडीए की ओर से प्रबल दावेदार कही जा रही वीणा देवी को टिकट हासिल करने के लिए कड़ी चुनौतियों का सामना करना पडे़गा!

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