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विभाग द्वारा पूर्ण किये गए सौ दिवसीय कार्यो पर मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने गिनाई उपलब्धियां

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स्टेट डेस्क/ लखनऊ। होमगार्ड्स एवं कारागार राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति आज लोकभवन स्थित मीडिया सेंटर में 100 दिवसीय कार्ययोजना अन्तर्गत अपने विभागों द्वारा पूर्ण किये गये कार्यों पर प्रेस वार्ता कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि होमगार्ड्स स्‍वयंसेवकों के मास्‍टररोल ऑनलाइन बनने लगे हैं इसमें मानवीय हस्‍तक्षेप समाप्‍त हो गया है। इससे होमगार्ड के ड्यूटी भत्‍ते का भुगतान बिना देरी किये होने लगा है। होमगार्ड्स स्‍वयंसेवकों का प्रशिक्षण भत्‍ता अब तक रू0-260/- प्रतिदिन था जबकि ड्यूटी भत्‍ता रू0-786 /- प्रतिदिन था । अब इस प्रशिक्षण भत्‍ते को भी ड्यूटी भत्‍ते के बराबर करते हुए रू0-786 /- प्रतिदिन कर दिया गया है जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्‍ता में वृद्धि होगी।

धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि शेष लक्षित कार्यों को यथाशीघ्र पूर्ण करा लिया जायेगा। इन कार्यों में होमगार्ड्स विभाग में रिक्तियों के सापेक्ष महिला एवं पुरूष होमगार्डस की भर्ती की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। महिला होमगार्डस स्‍वयंसेवकों को मातृत्‍व अवकाश की सुविधा भी शीघ्र प्रदान किये जाने पर विचार किया जा रहा है।

प्रजापति ने बताया कि इसके अलावा कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी मुख्यमंत्री की स्वीकृति से विभाग द्वारा किये गये है। उन्होंने बताया कि इसके अन्तर्गत 25,000 होमगार्डस जवान जो गृह विभाग से सम्बद्ध थे साथ ही यू0पी0-112 के अन्‍तर्गत दो पहिया एवं चार पहिया वाहन चालक के रूप 8924 होमगार्डस जवानों का वेतन पहले गृह विभाग से दिया जाता था जिसे मा0 मुख्यमंत्री जी से बात कर मैंने अपने होमगार्डस विभाग से दिलाना सुनिश्चित कराया है और इसके लिए प्राविधानित 25 अरब 70 करोड के बजट की व्यवस्था गृह विभाग से होमगार्डस विभाग में करा दिया गया जिससे कि जवानों को वेतन ससमय दिया जा सके।

धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि केन्‍द्रीय कारागार इटावा एवं के0का0 बरेली को क्रियाशील किये जाने हेतु क्रमश: 300, 392 पदों का सृजन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के दृष्टिगत प्रदेश की कारागारों में बीमार बंदियों के उपयोग हेतु 10 हैवी ड्यूटी वाशिंग मशीन (के0का0 नैनी (प्रयागराज), फतेहगढ़, बरेली, आगरा एवं जि0का0 गाजियाबाद, गोरखपुर, लखनऊ, अयोध्या, झॉसी, आदर्श कारागार लखनऊ में हैवी डियूटी वाशिंग मशीन स्थापित) को स्‍थापित एवं क्रियाशील करा दिया गया है।

प्रजापति ने बताया कि प्रदेश की 23 कारागारों की पाकशालाओं के आधुनिकीकरण हेतु आवंटित 29 चपाती मेकर मशीनों (जि0का0 गोरखपुर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलिया, कासगंज, बागपत, बरेली, शाहजहांपुर, कौशाम्बी, हमीरपुर, बहराइच, कानपुर नगर, लखनऊ, रायबरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, बिजनौर, अयोध्या, मऊ, गौतमबुद्धनगर तथा के0का0 नैनी, बरेली व आदर्श कारागार लखनऊ में चपाती मेकर मशीन स्थापित।) के संस्थापन का कार्य पूर्ण करते हुए क्रियाशील करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की कारागारों में आजीवन कारावास में निरुद्ध 500 बंदियों की रिहाई किये जाने के लक्ष्य के सापेक्ष 500 बंदियों की रिहाई आदेश निर्गत किये जा चुके हैं।

प्रजापति ने बताया कि कैबिनेट के एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत आजीवन कारावास से दण्डित सिद्धदोष बंदियों की 60 वर्ष की उम्र सीमा पूरी किये जाने की बाध्‍यता समाप्‍त कर दी गयी है। अब बंदी आजीवन कारावास का समय (16/20 वर्ष) पूरा कर रिहा हो सकता है। जिससे कम उम्र के बंदियों को लाभ प्राप्‍त होगा । इस संबध में 27 मई, 2022 को शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। उन्होने बताया कि प्रदेश की कारागारों में जनपद के मुख्‍य चिकित्‍साधिकारियों के माध्‍यम से टीम बनाकर प्रदेश की समस्त बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा चुका है।

धर्मवीर प्रजापति ने बताया कि प्रदेश की कारागारों में स्वयंसेवी संस्थाओ के सहयोग से बंदियों के आध्यात्मिक एवं नैतिक उत्थान हेतु योग एवं ध्यान के लक्ष्‍य के सापेक्ष कुल 15043 बंदियों को स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से उनके अध्यात्मिक एवं नैतिक उत्थान हेतु योग एवं ध्यान कराया गया। उक्त कार्य सतत जारी रहेगा। उन्होने बताया कि 16 कार्मिकों को उपकारापाल से कारापाल के पद पर पदोन्नति दिये जाने के साथ ही समूह क एवं ख 14 अधिकारियों को एसीपी का लाभ प्रदान किया गया है।

प्रजापति ने बताया कि कारागार विभाग में इसके अलावा भी बहुत से कार्य किये जाने की योजना संचालित है जिसके अन्तर्गत बंदियों के बच्‍चों को शिक्षा की व्‍यवस्‍था करायी जा रही है, बंदियों के बच्‍चों को खेल-कूद हेतु चिल्‍ड्रेन पार्क बनाये जा रहे है। उन्होंने बताया कि बंदियों से मिलने वाले उनके परिजनों को बैठने, छांव हेतु सेड बनाने तथा शीतल पेयजल की व्‍यवस्‍था हेतु निर्देशित किया गया है। 05 जून को पर्यावरण दिवस के अवसर पर बंदियों द्वारा व्‍यापक पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया है। उन्होंने बताया कि कारागारों में बंदियों द्वारा निर्मित सामग्री को जन सामान्‍य तक पहुँचाने के लिए आउटलेट की व्‍यवस्‍था की जा रही है।

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