राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तर्ज पर देश मे शीघ्र ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लागू करने का प्रस्ताव विचाराधीन

कानपुर ( अंकित दीक्षित ) : आरोग्य भारती कानपुर ,दीनदयाल शोध केंद्र और रोटरी क्लब ब्रह्मावर्त्त के संयुक्त तत्वावधान में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए आयुष मंत्रालय भारत सरकार की सलाह कार समिति के सदस्य डॉक्टर अशोक कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तरह शीघ्र ही देश में एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति लागू करने पर भी विचार चल रहा है डॉक्टर वार्ष्णेय , जो आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव भी हैं , मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे ।


उन्होंने कहा कि देश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में विषमता को दूर करने के लिए चिकित्सा स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में सभी मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धतियों जैसे एलोपैथी आयुर्वेद ,होम्योपैथी और यूनानी आदि के विद्यार्थियों को एक साथ 3 वर्ष तक एनाटॉमी ,फिजियोलॉजी पैथोलॉजी ,गाइनी सर्जरी ,ईएनटी आप्थाल्मालॉजी जैसे कॉमन विषयों का अध्यापन कराया जाना चाहिए और अंतिम वर्ष में एलोपैथी , आयुर्वेदिक , होम्योपैथी ,यूनानी आदि की औषधियों के निर्माण व उपचार का ज्ञान देना चाहिए और अंत में 1 वर्ष की संबंधित विशेषज्ञता में इंटर्नशिप करानी चाहिए इससे चिकित्सकों में आपसी विषमता नहीं होगी और सभी पद्धतियों के चिकित्सकों का एक ही स्तर होगा और वह एक दूसरे के पूरक हो सकेंगे l

मुख्य अतिथि डॉक्टर डीआर सिंह कुलपति चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय कानपुर ने इस अवसर पर बोलते हुए आशा व्यक्त की कि भारत में शिक्षा व स्वास्थ्य को अब सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी । उन्होंने कहा कि इस दिशा में भारत विश्व में अपना विशिष्ट स्थान बना भी चुका है कोरोना काल में इसकी पुष्टि भी हो चुकी है ।इस अवसर पर होम्योपैथी के जनक डॉक्टर सैमुअल हैनीमैन का 266वां जन्मोत्सव भी मनाया गया । आरोग्य भारती कानपुर महानगर के अध्यक्ष व वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉक्टर बी एन आचार्य ने बताया कि होम्योपैथी पूर्णतया स्वदेशी है और आयुर्वेद का ही परिष्कृत रूप स्वरूप है ।

उन्होंने श्रीमद् भागवत ग्रंथ के स्कन्ध-1 अध्याय 5 के श्लोक 33 का उल्लेख करते हुए बताया कि होम्योपैथी का सिद्धांत सिमिलिया सिमिलबस क्युरेन्टर वास्तव में इस उपरोक्त श्लोक में वर्णित है जिसे बाद में जर्मन एलोपैथिक चिकित्सक डॉक्टर हैनीमैन ने समझा और इसे होम्योपैथी का नाम दिया । यह पद्धति भारतवर्ष की मूल अवधारणा अहिंसा परमो धर्मा पर भी आधारित है क्योंकि इसमें इंजेक्शन चीर -फाड़ या कडुवी दवाएं आदि ना देकर मीठी गोलियों से इलाज किया जाता है साथ ही यह पद्धति अन पद्धतियों के अपेक्षाकृत कम खर्चीली है जिसके कारण देश में गरीबी की रेखा से नीचे के लोगों को भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है ।

समारोह में विशिष्ट अतिथि डॉ अनिल मिश्रा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कानपुर नगर ने आशा व्यक्त की वर्तमान समय में चल रही कोरोनावायरस के इस कठिन दौर में सभी चिकित्सा पद्धतियां मिलकर महामारी को हराएंगे । समारोह की अध्यक्षता करते हुए दीनदयाल शोध केंद्र छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर नगर के निदेशक डॉ श्याम बाबू गुप्ता ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि शरीर मन बुद्धि और आत्मा यह चारों अंग ठीक रहेंगे, तभी मनुष्य को चरम सुख और वैभव की प्राप्ति संभव है इसको उन्होंने एकात्मक मानववाद की संज्ञा दी ।समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को प्रसन्नता मिले ,यही देश की अवधारणा होनी चाहिए ।

धन्यवाद ज्ञापन आरोग्य भारती कानपुर प्रांत के अध्यक्ष श्री सुनील बाजपेई ने दिया।संचालन उपाध्यक्ष डॉ सीमा द्विवेदी ने किया। धनवंतरी स्तवन का पाठ सचिव डॉ अनोखेलाल पाठक द्वारा व शांति मंत्र डॉ देवेश तिवारी व श्रीनाथजी द्विवेदी द्वारा पढ़ाया गया ।इस अवसर पर डॉ हैनिमैन के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला गया तथा 11 वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सकों सर्वश्री डॉक्टर जी बी लाल ,डॉ उषा मिश्रा, डॉ विमल चंद्र आचार्य, डॉ राधेश्याम श्रीवास्तव, डॉ एस के अस्थाना, डॉक्टर आर के अग्निहोत्री, डॉक्टर आर के वशिष्ट, डॉक्टर बी पी सिंह चौहान, डॉक्टर एस के वर्मा, डॉ अरुण कुमार दीक्षित, डॉक्टर वी एस चंदेल, डॉक्टर एस एन मिश्रा और डॉ एस के निगम आदि का सम्मान शॉल पहनाकर व श्रीफल व होमियो रत्न स्मृति चिन्ह देकर किया गया । इस कार्यक्रम में आरोग्य भारती यह कानपुर संरक्षक श्री अजीत अग्रवाल रोटरी क्लब ब्रह्मा वर्त्त के अध्यक्ष डॉक्टर भक्ति विजय शुक्ला मंडल अध्यक्ष श्री अरविंद अवस्थी रोटेरियन प्रीति अवस्थी रोटेरियन मयंक अवस्थी सचिव आदि ने विशेष रुप से सहयोग व सहभागिता की।