उदार हृदय एवं इंद्रियों को नियंत्रित रखने हेतु सदैव प्रयत्नशील ही वैष्णव – छबीले लाल

वृंदावन/प्रतिनिधि : वैष्णव वास्तव में वह होता है, जो अपने हृदय को प्रत्येक परिस्थिति में उदार रखता है और अपनी इंद्रियों को नियंत्रित रखने हेतु सदैव प्रयत्नशील होता है। उक्त विचार स्थानीय कुंभ नगर में निर्मित रसिया बाबा नगर में आयोजित भक्ति रस वर्धिनी वार्ता सत्र में अष्टम दिवस पर प्रवचन देते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने वैष्णव महिमा पर बोलते हुए कहा कि भगवान विष्णु, कृष्ण एवं राम भगवान की उपासना करने वाला वैष्णव बिना तृप्त हुए भगवत नाम, प्रवचन/भागवत कथा श्रवण एवं सत्संग, दर्शन आदि करते रहते हैं। उन्होंने सच्चे वैष्णव को जीव मात्र के प्रति प्रेम रखने वाला और परोपकार की भावना रखने वाला बताया। इससे पूर्व उन्होंने श्री श्रीनाथजी प्रभु की पूजा अर्चना भी की।

प्रवचन के दौरान शरणागति परिवार के अध्यक्ष रसिया बाबा, संत राजा बाबा, श्री महंत राधाकांत दास जी महाराज, सचिव शशिकांत भंडारी, कन्हैया अग्रवाल स्वीटी सुपारी वाले, प्रदीप चौधरी, बॉबी हाथी वाले, लड्डू जी हैदराबाद वाले एवं प्रवक्ता देव द्विवेदी सहित अनेकों श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।