27.1 C
Delhi
Homeउत्तर प्रदेशडीएम के आदेशों को ठेंगा, 50 हजार में दलाल दिला रहे निजी...

डीएम के आदेशों को ठेंगा, 50 हजार में दलाल दिला रहे निजी अस्पताल में बेड़

- Advertisement -

कानपुर / अनू अस्थाना : कोरोना महामारी के बीच निजी कोविड अस्पताल पूरी तरह से मनमानी पर उतारू हैं। किसी भी नियम-कानून की धज्जियां उड़ाने में जरा सा भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। आम लोग कोरोना संक्रमित मरीज को लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं। अस्पतालों में उनको भर्ती नहीं किया जा रहा। ऑक्सीजन, बेड, आईसीयू और वेंटिलेटर के लिए मारामारी है। प्रशासन की ओर जारी रिपोर्ट में प्राइवेट हाॅस्पिटलों में बेड़ उपलब्ध नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ दलाल इन बेड़ का सौदा कर रहे हैं। प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक कोविड स्टेटस हाॅस्पिटल में केवल जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज में 47, रामा मेडिकल काॅलेज में 174 और एसपीएम हाॅस्पिटल में सिर्फ एक बेड़ उपलब्ध है।

वहीं दलाल 50-60 हजार रुपये में निजी अस्पतालों में बेड़ दिलाने का दावा कर रहें हैं। दलालों का दावा है कि वह उन अस्पतालों में बेड़ मुहैया कराएंगे जहां पर अस्पताल में बेड़ फुल होने का बोर्ड लगा है। वहीं, प्रशासन भी आंख मूंदकर मान लेता है कि निजी अस्पतालों में बेड़ फुल हैं। यदि ऐसा है तो दलाल सक्रिय कैसे।

हैलट के बाहर अपनी माता को एडमिट कराने के लिए धक्के खा रहे काकादेव निवासी मनमोहन शर्मा ने बताया कि उन्होंने सुबह जब ममता देवी की तबियत बिगड़ी तो अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कंट्रोल रूम में काॅल किया, जहां पर सिर्फ दो अस्पतालों में बेड़ खाली होने के लिए बताया गया। रामा दूर होने कारण मेडिकल काॅलेज में भर्ती करने पहुंचे लेकिन पिछले एक घंटे से सही उत्तर नहीं दिया जा रहा है। तब ही उन्हे परेशान देखकर एक व्यक्ति उनके पास आया। जिसने कहा कि वह किसी भी प्राइवेट अस्पताल में मरीज को भर्ती करा सकता है, बस उन्हें इसके लिए 50-60 रुपये खर्च करने होंगे। वो कई निजी अस्पतालों के नाम भी लेता है। ये सारे वही अस्पताल थे जहां के बेड फुल बताए जा रहे हैं। दलाल ने बताया कि अस्पतालों को भी कुछ न कुछ देना पड़ता है।

अस्पताल कैश देने वाले लोगों दे रहे तवज्जो
दलाल ने बताया कि आज के दिनों में बेड़ मिलना बेहद मुश्किल है, इसलिए अधिक खर्चा लग रहा है। अस्पताल अधिक से अधिक कैश ले रहे हैं। वो भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कम करना चाहते हैं। अब सवाल है कि इस तरह के दलाल सक्रिय हैं तो प्रशासन क्या कर रहा हैं। इसके अलावा निजी कोविड अस्पताल कैशलेस कार्ड देखकर कोविड रोगी को भर्ती तक नहीं कर रहे हैं। बीते वर्ष इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) की पहल पर साधारण बीमा कंपनियां और निजी कंपनियां कई तरह की पॉलिसी लाई थी। सरकार ने कोरोना कवच और कोरोना रक्षक नाम की पॉलिसी भी बीमा कंपनियों से जारी करवाई थी। इसमें कंपनियां साढ़े तीन माह से लेकर साढ़े नौ माह की अवधि की पॉलिसी लेकर आई थी जिसे लोगों ने हाथों हाथ लिया था। इसमें कोरोना के अलावा अन्य इलाज की भी सुविधा दी गई थी। लेकिन अब ये पॉलिसीधारक परेशान हैं।

- Advertisement -


- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -
Related News
- Advertisement -