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रेमडेसिविर प्रकरण में 53 कर्मियों पर गिरी गाज, सिस्टर इंचार्ज और फार्मेसिस्ट निलंबित, इंक्रीमेंट पर भी रोक

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कानपुर / अनू अस्थाना: कानपुर हैलट में कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत के बाद भी उनके नाम पर रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी कराने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज प्राचार्य डॉ. संजय काला ने शुक्रवार को दो फार्मासिस्ट नागेन्द्र बाजपेई, संजीव सिंह और सिस्टर इंचार्ज अंजुलिका मिश्रा को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही उनका एक साल का इंक्रीमेंट भी रोक दिया गया है और तीनों को नोटिस जारी कर निर्देश दिए गए है कि अगर दोबारा इस प्रकार की कोई गड़बड़ी की गई तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। वहीं अप्रैल और मई के दौरान न्यूरो कोविड में एसआईएस कम्पनी के माध्यम से तैनात 50 आउटसोर्स नर्स, वार्ड ब्वॉय और सफाई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।

हैलट के कोविड न्यूरो साइंस भवन में कोरोना के मृत मरीजों के नाम पर रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी कराने का खुलासा हुआ था। जिलाधिकारी की जांच में इसकी पुष्टि भी हुई थी। डीएम की रिपोर्ट मिलने के बाद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने शुक्रवार को पूरे दिन सभी विभागाध्यक्षों और पटल प्रभारियों संग बैठकें की। इसमें उन्होंने रेमडेसिविर मामले में दोषियों को मेडिकल कॉलेज की छवि खराब करने का सीधा जिम्मेदार माना, जिसमें बाद उन्होंने दोषी स्टॉफ को निलंबित कर उनके इंक्रीमेंट पर भी रोक लगा दी है। इस कार्रवाई से उनकी पेंशन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्योंकि उनकी सर्विस बुक में वृहद दंडात्मक कार्रवाई दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

मेडिकल कालेज के प्रवक्ता डॉ. गणेश शंकर ने बताया कि दो महीने पहले कोविड न्यूरो साइंस भवन में तैनात रहीं सिस्टर इंचार्ज अंजूलिका, फार्मेसिस्ट नागेंद्र वाजपेयी, संजीव सिंह के खिलाफ आरोप सिद्ध हुए हैं। इसके बाद इनके निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा 50 अन्य स्टाफ नर्सों, वार्डब्वाय, सफाई कर्मियों, गार्डों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई है।

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