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Kanpur: डॉक्टरों को कोरोना काल में मरीजों की जान ना बचा पाने का हैं अफ़सोस

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कानपुर/ ऋचा: समाज के प्रति चिकित्स्कों की भूमिका और उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के लिए देश में 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। इस दिन देश के महान डॉक्टर्स बिधान चंद्र राय की पुण्यतिथि होती हैं। अबकी डॉक्टर्स डे पर कोरोना के दौरान हुई सैकड़ो डॉक्टर्स की मौतों के चलते वह उत्साह नहीं हैं जो होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में आज डॉक्टरों की सेवाओं का खासतौर पर उल्लेख किया।

डॉक्टर्स के विभिन्न संघटनों ने कोरोना संक्रमण की वजह से जान गवाने वाले डॉक्टर को श्रद्धांजलि अर्पित की। IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की रिपोट्र्स के अनुसार, जान गवाने वाले डॉक्टरों की संख्या 730 हैं। इन डॉ में सबसे ज़्यादा 115 डॉक्टर बिहार के हैं। उसके बाद दिल्ली का नंबर आता है, जहां 109 डॉ की मौत हुई। यूपी में यह संख्या 79 हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, जब से कोरोना ने कहर बरपाना शुरू किया, तबसे अब तक 1.19 लाख स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी जान गवाई हैं। इस भयावह महामारी से विश्व भर में 18 करोड़ 30 लाख के करीब संक्रमित हुए हैं और 40 लाख से ज़्यादा मौतें हुई है।

कोरोना से लड़ने में डॉक्टर्स की अहम भूमिका रही हैं। उनकी क़ुरबानी से लोगों की आँखे नम हैं। डॉक्टर्स डे पर एक और चौकाने वाला आंकड़ा आईएमए ने पेश किया है जिसमें कहा गया है कि देश में अब तक 1492 डॉ की मौत हो गयी हैं। इन डॉ ने अपनी जान की बाजी लगाकर भारी संख्या में कोरोना संक्रमितों की जान बचाई। दूसरी लहर के दौरान सिर्फ 2 महीनों में सबसे ज़्यादा डॉक्टर्स की मौत हुई। इसमें दिल्ली के डॉक्टर्स की संख्या ज़्यादा हैं।

डॉक्टर्स डे पर यह उल्लेख करना लाज़मी होगा की देश का चिकित्सीय ढांचा बुरी तरह ध्वस्त हैं। प्रति हज़ार लोगों पर देश में 0.8 डॉक्टर्स हैं। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने संसद में दिए बयान के मुताबिक भारत में 1457 वयक्तियों पर सिर्फ 1 डॉक्टर्स होने की जानकारी दी। देश में 11.57 डॉक्टर्स हैं। कोरोना काल में काम के अतिरिक्त दवाब में कुछ डॉ को काम छोड़ने तक पर मजबूर कर दिया।

दैनिक भास्कर के सर्वे के अनुसार, 92% डॉक्टर्स को सुविधाओं के अभाव में कोरोना के मरीजों को ना बचा पाने का अफ़सोस हैं। इसके बाद भी 57 लोग चाहते है उनके बच्चे डॉक्टर्स बने।

MBBS
Medical officer- 7 Airforce hospital
MD – Utkarsh Nursing college & Hospital

शाम होते-होते हमने कई डॉक्टर्स से बात भी की। हमने बात की सबसे पहले डॉ. उत्कर्ष द्विवेदी से। जिन्होंने बताया की कोरोना काल और उससे पहले से ही सभी डॉ पूरी कर्त्तव्यनिष्ठा से कार्य कर रहे थे। हमारा समर्पण मरीज को लेकर हमेशा 100% रहा हैं। दूसरी लहर ने बहुत से डॉ को भी अपनी चपेट में लिया। डॉ. द्विवेदी ने बताया की उनके बहुत से साथी भी वेंटीलेटर तक गए, वो सब ठीक होकर वापस अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। एक- दो साथी की मौत भी हुई। पर हमरा समर्पण पूरा है, इस महामारी को लेकर। अपनी सेवाए ऐसे ही जारी रखेंगे। मेडिकल सिस्टम में डॉ, और फ्रंटलाइन वर्कर के लिए प्रावधान बनाये, जिससे डॉ अपनी सेवाएं बिना बाधा के दे सके। हेल्थ सेक्टर में सरकार को थोड़ी फंडिंग बढ़ानी होगी। हेल्थ सेक्टर से जुड़े सभी वर्कर के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाये।

डॉ. द्विवेदी ने जब हेल्थ सेक्टर पर काम होगा तो हर एक वर्कर बेफिक्र होकर काम करेगा। प्राइवेट और सरकारी दोनों अस्पतालों में सुविधा अच्छी हो। डॉ. द्विवेदी का हॉस्पिटल भी है जो कोरोना काल में भी पूरा समर्पण भाव से सेवा देता रहा।

Dr. Mayank Bhargav
Spine specialist

वरिष्ठ स्पाइन स्पेशलिस्ट डाक्टर मयंक भार्गव ने कहा कि चिकित्सक जगत में आने वाले सभी डाक्टर पहले से ही सेवाभाव का संकल्प लेकर आते है। महामारी काल में चिकित्सकों ने जन-जन की जान बचाने के लिए रात दिन एक कर दिया। कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने डाक्टरो को भी प्रभावित किया हैं। भागर्व ने कहा कि पिछला समय जो कोरोना काल का था उसने पूरे हेल्थ सिस्टम पर असर डाला। हमारे हेल्थ सिस्टम ने 70 प्रतिशत काम किया हैं। डॉ और गवर्मेंट ने अपनी तरफ से पूरी 100% दक्षता दी हैं। टीकाकरण अभियान में हम सभी का साथ मिला हैं। सभी को आगे आकर टीका लेना चाहिए। डॉ. भार्गव कहा कि खतरा कम नहीं हुआ है। इसलिए आज डाक्टरर्स डे पर सभी से आग्रह करना चाहता हूं कि सतर्कता बनाएं रखे। सरकार की गाइडलाइन का पालन करें।

Dr. Deepak Seth
MBBS

डॉक्टर्स डे पर हमने बात की, डॉ दीपक सेठ से। जिन्होंने बताया की कोरोना काल में उनके पास सबसे ज़्यादा खाँसी, जुकाम के पेशेंट आते थे। इस महामारी को लेकर लोग बहुत जल्दी पैनिक कर रहे थे। डॉ. सेठ ने बताया की कोरोना महामारी में बहुत से डॉक्टर की जान चली गयी। कोरोना को लेकर बहुत भ्रांतिया भी थी। उन्होंने बातचीत में डॉ. के.के अग्रवाल को भी याद किया। डॉ. सेठ ने सरकार और हेल्थ मिनिस्ट्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि सबसे पहले टीकाकरण अभियान की शुरुआत डॉक्टर्स और फ्रंटलाइन वर्कर से हुई। जिसका फायदा यह रहा की दूसरी लहर में डॉ बिना रुके सेवा दे रहे थे। थर्ड वेव को लेकर उन्होंने कहा हम सभी को जागरूक रहनी की आवश्यकता है। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें। अभी खतरा टला नहीं हैं। इसलिए भीड़ वाली जगह से बचे बारी आने पर टीका अवश्य लें। यह टिका पूरी तरह से सुरक्षित हैं।

Dr Praveshika Shukla
Bams
Institute of medical science, BHU

डॉक्टर्स डे पर डॉ. प्रवेशिका शुक्ला का कहना हैं कि केंद्र सरकार ने हल्के लक्षण के लिए होमियोपैथी से कोरोना के इलाज को मंजूरी दे दी है। कोरोना काल लोगों का आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ा है। लोगों का प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद की तरफ रुझान दिखाया हैं। डॉ. शुक्ला ने बताया कि कोरोना के समय उन्होंने टेलीपैथी से भी लोगों को इस महामारी के समय बात करके हौसला बढ़ाया हैं। लोगों को महामारी के समय धैर्य से काम करने की सलाह भी दी।

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