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BIG BREAKING : कोरोना के चलते विश्वविद्यालयों के तीस लाख छात्र बिना परीक्षा दिए ही पास हो जाएंगे

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  • स्नातक प्रथम, द्वितीय वर्ष व स्नाकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्रों को नहीं देनी पड़ेगी परीक्षा
  • निर्णय देने को तीन सदस्यी कमेटी बनी, इसमें हैं कानपुर, लखनऊ व रुहेलखंड के कुलपित

कानपुर/महेश शर्मा : कोविड-19 की तीसरी लहर को लेकर अटकलों के बीच यूपी गवर्नमेंट विश्वविद्यालय के छात्रों के भविष्य को लेकर बहुत बड़ा फैसला लेने की तैयारी में हैं। अब स्नातक (यूजी) के प्रथम एवं द्वितीय व तृतीय वर्ष वाले छात्रों तथा स्नातकोत्तर (पीजी) के प्रथम वर्ष के छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही प्रोन्नति दी जाएगी। जानकारी के अनुसार बिना परीक्षा दिए आगे की क्लास में पढ़ने के इस अवसर का लाभ करीब तीस लाख छात्रों को मिलेगा।

इसके लिए तीन कुलपतियों की एक हाईलेवल कमेटी गठित की गयी है जो हफ्ता भीतर रिपोर्ट देगी। कुलपितयों की कमेटी इन तीन बिंदुओं पर विचार करके सरकार को रिपोर्ट देगी। प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को किस आधार पर प्रोन्नति दी जाएगी, अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा कैसे आयोजित की जाएगी और सेमेस्टर परीक्षाओं के क्या नियम होंगे। एक बात उल्लेखनीय है कि स्नातक के अंतिम वर्ष के बीए, बीएससी व बीकॉम के छात्रों को परीक्षा देनी पड़ेंगी।

ये परीक्षाएं बकौल विश्वविद्यालय जून-जुलाई में संभव हैं। सरकार ने इस पर निर्णय के लिए तीन कुलपतियों की हाई लेवल कमेटी बनायी है। इस कमेटी में छत्रपति शाहूजी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.विनय पाठक भी शामिल है। इस कमेटी से कहा गया है कि इस मामले पर हफ्ते भीतर रिपोर्ट दें ताकि सरकार जल्दी फैसला ले सके।

तीन कुलपतियों की कमेटी में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपित प्रो.आलोक राय, रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.कृष्णपाल सिंह तथा छत्रपति शाहूजी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपित प्रो.विनय पाठक शामिल हैं। प्रो.विनय पाठक ने बताया कि कमेटी से सात दिन में रिपोर्ट देने की सरकार ने अपेक्षा की है। प्रो.पाठक ने बताया कि इस कमेटी की बैठक होनी है। अभी यह कुछ नहीं कहा जा सकता है कि सप्ताह भीतर कुलपतियों की यह कमेटी रिपोर्ट दे देगी। पर कोशिश होगी शीघ्र रिपोर्ट सौंप दें।

उन्होंने बताया कि ऐसा कोविड-19 के चलते हुआ है। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद ऐसी घोषणा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पहली बैठक होने वाली है तारीख शीघ्र ही तय की जाएगी। वर्तमान हालात और छात्रों के भविष्य के दृष्टिगत ही उचित निर्णय लिया जाएगा। पता चला है कि सेमेस्टर के हिसाब से पढ़ने वाले छात्रों के भी एक से पांचवें सेमेस्टर तक परीक्षाएं नहीं करायी जा सकती हैं।

इनमें बी.टेक, फार्मेसी, मैनेजमेंट जैसे कोर्सों के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं जून-जुलाई में हो सकती है। उत्तर प्रदेश में कोरोना के ताजे हालात के मुताबिक कोरोना मामलों में गिरावट के साथ ही ब्लैक फंगस और तीसरी लहर का भय सामने है। बताते हैं कि ऐसे में सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। लॉकडाउन के कारण कोरोना मामलों में गिरावट आयी है। हां शहरी और ग्रामीण इलाकों में मौत का आंकड़ा बढ़ा है।

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