100 साल की लाइफ लाइन पूरी कर चुके गंगापुल के पिलर में आयी दरार

कानपुर/अखिलेश मिश्रा : मां गंगा पर बना कानपुर से शुक्लागंज को जोडने वाले इस पुल की लाइफ लाइन पूरी हो जाने के कारण इसके पिलरों में बडी दराज आ गयी है। जिसके कारण पुल का आवागमन फिलहाल रोक दिया गया है। जबकि,ठीक इसके सामान्तर बने रेलवे पुल की समय-समय पर मरम्मत होती रहती है। जिसके कारण वह अपडेट है। जबकि, प्रतिदिन इस पुल से लाखों वाहन गुजरते है। लेकिन किसी भी अधिकारी को यह ज्ञात नहीं है कि इसकी रिपेरिंग कब हुई थी।

फिलहाल आईआईटी के इंजीनियर इस पुल का सर्वे करेंगे। उसके बाद आगे के आवागमन की स्थिति तय होगी। उन्नाव से कानपुर नगर को जोडने में इस गंगापुल की महत्वपूर्ण भूमिका है। जानकारों के अनुसार, इस ऐतिहासिक पुल का निर्माण 1857 में हुआ था। एक किलोमीटर इस लंबे पुल को 28 मजबूत पिलरों का सहारा मिला था। इंजीनियर की मानें तो इस तरह के पुलों की आयु 100 होती है। इसके बाद इनकी देखरेख अति आवश्यक है। लेकिन यह पुल अपनी उम्र को पार करके 64 साल तक दोनों जिलों के लोगों को जोडता रहा।

उम्र से अधिक लोड होने पर इसके 24 पिलरों में से चार में मोटी दराजें आ गयी। जिसके कारण संचालन रोक दिया गया। जानकारों की मानें तो इस पुल का मरम्मत कार्य कब हुआ था इसकी किसी के पास को जाकनारी उपलब्ध नहीं है। पिलर में दराज आने की स्थिति में जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने तत्काल प्रभाव से इसे बंद करा दिया। अब पुल की स्थिति को आईआईटी के इंजीनियर चेक करेंगे और फिर आगे की रणनीति तय होगी।

पुल के आसपास रहने वाले स्थानीय लोग बताते है कि इस पुल के साथ भेदभाव हुआ है। ठीक बगल में रेलवे पुल की मरम्मत का कार्य समय-समय पर होता रहता है जबकि इसे उपेक्षित छोड दिया गया। मरम्मत के अभाव में पुल की यह स्थिति हो गयी है। पीडब्लूडी के चीफ इंजीनियर केसी वर्मा का कहना है कि पुल का निरीक्षण होने के बाद आगे के यातायात संचालन की रणनीति तय होगी।