25 साल बाद बिकरू में हो रहे चुनाव, दस उम्मीदवार आज़माने उतरे हैं किस्मत

कानपुर/फैज़ान हैदर : पंचायत चुनाव में इस बार बिकरू गांव में आजादी जैसा जश्न मनाया जा रहा है। ढाई दशक बाद यहां अब वास्तव में चुनाव होने जा रहे हैं। हालाकिं इससे पहले गैैंगस्टर विकास दुबे के खौफ से कभी उसके परिवार के सदस्य तो कभी गुर्गे प्रधान बनते आए थे। वहीँ इस बार आरक्षित सीट पर 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है जो बेखौफ हो कर चुनाव प्रचार करते नज़र आ रहे हैं। बीते साल दो जुलाई को आठ पुलिसकर्मियों के जघन्य हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आए बिकरू गांव में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने लोकतंत्र भी बंधक बना रखा था। ढाई दशक से उसकी मर्जी से ही गांव में प्रधान चुने जाते रहे हैं। विकास और उसके पांच गुर्गों के मारे जाने के बाद गांव के लोगों में उसका खौफ अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।


इस बार बिकरू ग्राम पंचायत में प्रधान पद के लिए अनुसूचित जाति के 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। गांव की गलियों में चुनावी चर्चा के साथ चहल पहल भी बढ़ गई है। गांव में बानी मस्जिद के पास एक किराना दुकान पर युवा व बुजुर्ग चुनाव पर चर्चा कर रहे थे। 80 वर्ष के बुजुर्ग खुदाबख्श, मेहंदी हसन व राम किशन से बात की तो उन्होंने एक तरफ़ा बोला कि बिकरू में अब सब आजाद हैं और 25 बरस बाद वह अबकी बार परधानी के वोट डालेंगे। बगल में बैठे जिब्रील, शानू, मुन्नू व कल्लू विकास दुबे के ढाए गए किले की ओर इशारा करते हुए बोले कि बड़ा खौफ था दिलों में। मारे डर के कोई चुनाव लड़ने की हिम्मत तो दूर सोच भी नही पाता था। वह जिसे खड़ा कर देते वही चुन लिया जाता था।

बिकरू ही नहीं आसपास के 10 ग्राम पंचायतों में कुख्यात विकास की दखलंदाजी थी वह जिसे चाहता था प्रधान बनवा देता था। वर्ष 1995 में बिकरू गांव के प्रधान राम सिंह यादव को पीटने के बाद वह प्रधान का चुनाव जीता था जिसके बाद वर्चस्व ऐसा क़ायम किया कि गांव में कोई सामने टिका ही नहीं। वर्ष 2000 में घिमऊ से जिला पंचायत का चुनाव जीतने के बाद बिकरू की आरक्षित सीट से नौकर की पत्नी गायत्री देवी को ग्राम प्रधान बनाया। वर्ष 2005 में भाई दीप प्रकाश की पत्नी अंजली दुबे को निर्विरोध निर्वाचित कराया और फिर वर्ष 2010 पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर करीबी रजनेश कुशवाहा औक 2015 में अंजली दुबे को फिर निर्विरोध प्रधान बनवाया था।