लाॅकडाउन के डर से अप्रवासियों की फिर होने लगी गांव वापसी

कानपुर/अखिलेश मिश्रा : पिछले साल की तरह एक बार फिर कोरोना के दस्तक देने से अप्रवासी मजूदर दहशत में है। इसलिए हिम्मत जुटाकर जो वर्कर काम पर मुंबई,अहमदाबाद,सूरत व दिल्ली पहुंचे थे। वह लाॅकडाउन की स्थिति भांप कर उलटे पांव गांव-घर की वापसी कर रहे है। सबसे अधिक वापसी मुंबई में काम करने वालों की हो रही है। मुंबई से होकर कानपुर आने वाली सभी गाडियां अप्रवासी वर्करों से फुल है। स्थिति यह है कि जनरल कोच में इतनी भीड़ है कि पैर रखने की जगह नहीं है।


सीटों पर चार सवारियों के स्थान पर छह से अधिक लोग बैठकर घर वापसी कर रहे है। इधर आने वाली गाड़ियों की स्थिति देखकर साफ है कि मुंबई जैसी हाइटेक सिटी में अब वर्कर फंसना नहीं चाहता है।मुंबई सिटी तो पहले से ही कोरोना महामारी से जूझ रहा था। उसकी स्थिति तो अभी तक सामान्य नहीं हो पायी थी। लेकिन होली पर्व के बाद बडी संख्या में यूपी व एमपी में संक्रमण बड़ा। जिससे हालात काफी दयनीय हो गये।

स्थिति यह हो गयी कि सीएम के आदेश पर जिला प्रशासन को रात के समय आने-जाने पर प्रतिबंध लगाया पड़ा। हालातों के मद्देनजर अप्रावासी मजदूर किसी अनहोनी की आशंका से मुंबई,अहमदाबाद व सूरज जैसे सिटी में काम करने वाले एक बार फिर घर वापसी का मन बना लिए है। वर्तमान हालातों पर नजर डाले तो लोकमान्य तिलक टर्मिनल से गोरखपुर आने वाली गाड़ी ठसाठस वर्करों से भरी पड़ी थी। पूरी गाड़ी के जनरल कोच में सुई रखने की जगह नहीं थी। स्लीपर कोच का भी यही हाल था। सिर्फ एसी कोच में राहत थी। यहीं हाल लगभग मुंबई से चलकर विभिन्न सिटी जाने वाली सभी गाड़ियों का है। ऐसी स्थिति यानी मायानगरी से आने सभी ट्रेनों की है।

इतनी भीड़ होने के कारण कोविड नियमों की जमकर धज्जियां उड़ रहीे है। वर्कर भले ही महामारी से बचने के लिए घर वापसी कर रहे है। लेकिन इतनी भीड़ वाली गाडियों में आकर कितना सुरक्षित है। यह भी एक बडा प्रश्न है। फिलहाल फिल्म नगरी से आने वाली गाडियां पनवेल गोरखपुर, कुशीनगर एक्सप्रेस, बांद्रा कानपुर, बांद्रा गोरखपुर व एलटीटी लखनऊ जैसी सभी गाडियां का यही हाल है।

यूपी के बस्ती जिले में रहने वाले राजू बताते है कि मुंबई में रात को प्रतिबंध है दिन में दुकानें बंद रहती है। वे पेशे से चालक है ऐसी स्थित मेें वहां रूकने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए काम बंद है। मजबूर होकर घर वापसी कर रहा हूं। वाराणसी के प्रशांत का कहना है हालात देखकर गांव वासपी का निर्णय लिया। आरक्षण न होने के कारण कल्याण स्टेशन से 600 रूपये की रसीद कटाकर वापसी की है। मुंबई में सैलून का कारोबार करने वाले हैदर भाई ने बताया कि स्थिति खराब होने के कारण दुकान कई दिनों से बंद थी। पैसा नहीं बचा तो घर वापसी का निर्णय लिया।