KANPUR : केडीए के जवाहरपुरम् सेक्टर प्लान में फंस गये आवंटी और ठेकेदार

कानपुर/अखिलेश मिश्रा : कानपुर विकास प्राधिकरण ने विकास का खाका इतनी से खींचकर दो योजनाएं कार्यान्वित करा दी। योजना के अन्तर्गत बड़ी संख्या में लोगों ने भवन आंवटन की प्रक्रिया करके एलाट करा लिए। लेकिन जिस भूमि पर भवन निर्माण का कार्य या विकास होना है। उससे संबंधित सारी औपचारिकताएं पूरी नहीं की। जिस कारण भवन का विकास कार्य किसानों के विरोध के कारण उलझ गया है।


जबकि,योजना के अन्तर्गत सम्पूर्ण कार्य एक साल के अंदर यानी 2019 फरवरी से चालू हुआ निर्माण 2020 में समाप्त करना था। लेकिन जिस कम्पनी ने विकास कराने का ठेका लिया था। वह भी अपने को ठगा सा महूसस कर रही है। क्योकि विवाद उत्पन्न होने के कारण भूमि पर कार्य रूक गया है। जहां निर्माण कार्य होना है वहां पर किसानों ने फसल लगा रखी है। ऐसे में स्थिति दयनीय है।

कानपुर विकास प्राधिकरण ने जवाहरपुरम् सेक्टर योजना के अन्तर्गत 216 भवनों के निर्माण का खाका खींचा और इनके निर्माण व विकास का कार्य इनफास्ट्क्चर डेवलपमेंट को दे दिया। इतना ही नहीं लापरवाही के बीच जिस भूमि पर कार्ययोजना प्लान हुई।वह सब किसानों की है। किसान व प्राधिकरण के बीच लिखापढी का कार्य अधूरा है। जिस कारण योजना तो हडबडी में लाॅच हो गयी।

जरूरत लोगों ने भवन पाने की औपचारिकता करके अपना काम कर लिया। लेकिन किसानों की भूमि पर जब विकास के लिए कम्पनी गयी तो विवाद की स्थिति बन गयी। योजना वाली जमीन पर ग्रामीणों की फसलें खडी है। इतना ही नहीं कम्पनी मेसर्स रजत कंस्ट्क्षन ने समस्त हालातों से अवगत कराते हुए केडीए उपाध्यक्ष को पत्र लिखा। कम्पनी के अधिकारी बताते है कि योजना क्षेत्र में नाला निर्माण का कार्य हो गया है।

नाला को शिवली रोड की कटिंग करके जोडना है लेकिन उसके लिए पीडब्लडी से एनओसी चाहिए। यह काम केडीए का था लेकिन अभी तक एनओसी उपलब्ध नहीं हो सकी है। जिससे कार्य थम गया है। कम्पनी का कहना है कि विकास कार्य के अन्तर्गत सभी मशीन स्पाॅट पर खड़ी है लेकिन उपयोग नहीं हो रहा है जबकि उनका किराया मीटर चालू है। ठेकेदार कम्पनी ने प्राधिकरण से कहा कि वह भूमि विवाद क्लीयर करे और विकास की समय सीमा बढाएं। इन स्थितियों में आवंटी और ठेकेदार केडीए के जाल में फंसकर ठगा सा महसूस कर रहे है।