KANPUR : गैंगस्टर विकास दुबे के बिकरु गांव को मिला 25 साल बाद अपनी पसंद का प्रधान

कानपुर/हनुमंत सिंह : देश का बहुचर्चित बिकरु गांव का नाम शायद ही कोई ऐसा हो जो ना जानता हो। ये कानपुर का वही गांव है, जहां पर देश का मोस्ट वांटेड विकास दुबे का राज चलता था। बीते साल विकास दुबे ने कानपुर के अपने बिकरु गांव में सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद फरार विकास दुबे को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। इस गांव में उसकी इतनी दहशत थी।


उसके बाद से हर बार उसके खौफ के साए में ही चुनाव होते थे. इसी तरह बिकरु ग्राम पंचायत में वर्ष 1995 में विकास दुबे पहली वार ग्राम प्रधान बना था इसके बाद साल 2000 में उसने अपने नौकर की पत्नी गायत्री देवी को बिकरु ग्राम पंचायत से ग्राम प्रधान बनवाया था.जबकि बिकरू गांव से सटे हुए भीटी ग्राम पंचायत में साल 2005 में बिकास दुबे ने अपने छोटे भाई अविनाश दुबे को ग्राम प्रधान बनाया था, जिसकी मौत हो जाने के बाद विकास दुबे ने अपने सिपह सलार जिलेदार यादव के बेटे को ग्राम पंचायत का ग्राम प्रधान बनाया था ।

इसके बाद 2010 में गैंगस्टर विकास दुबे ने अपने नौकर रामनरेश कुशवाहा को ग्राम प्रधान बनवाया था। 2015 में विकास की अनुज वधू अंजली दुबे ग्राम प्रधान बनी। इसी दहसत के चलते उसके गुर्गे लोगों को डरा धमकाकर वोट अपने उम्मीदवारों के नाम करवाते थे. जो कोई भी उसका विरोध करने की कोशिश करता था उसकी आवाज को पैसे के बल पर दबा दिया जाता था। इस रिजर्व सीट पर इस चुनाव में 10 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया था. उम्मीदवारों ने बिना डरे अपनी जीत के लिए खुलकर चुनाव प्रचार भी किया था। इसी बजहा से बिकरू गांव में ढाई दशक तक यहाँ पर प्रधानी के चुनाव नहीं हुए थे।

लेकिन आज 25 साल के बाद एक बार फिर इस गांव में निष्पक्ष वोटिंग के बाद आरक्षित सीट पर मधु ने जीत हासिल की है। मधु ने अपने प्रतिद्वंदी बिंदु कुमार को 54 वोटों से हराकर बिकरु गांव की प्रधानी हासिल करी। उन की इस जीत के बाद उन्होंने कहा कि, उनका सबसे पहला कार्य होगा। कि गांव के बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दी जाए। उसके बाद गांव के लोगों में जो अभी भी विकास दुबे को लेकर दहशत बनी हुई है। उसे दूर की जाए। इसके साथ ही पक्की सड़कें, शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था इत्यादि पर उनका जोर रहेगा। खास बात ये है कि बिकरू गांव में अब विकास दुबे की दहशत से पूरी तरह से मुक्त हो चुका है. यहां पर 25 साल बाद गांव वालों को अपनी पसंद का प्रधान मिला है, जिसे उन्होंने अपनी मर्जी से चुना है,