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कानपुर : अंतिम समय तक बीसीसीआई क्लब में शामिल नहीं हो पाया यूपीसीए

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कानपुर,भूपेंद्र सिंह। और आखिर वही हुआ जिसका डर यूपीसीएके सदस्यों को सता रहा था शनिवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ( बीसीसीआई) के चुनाव में उत्तरप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) भाग नही ले पाएगा। यह पहला मौका होगा जब प्रदेश का प्रतिनिधित्व नही होगा।

अंतिम समय तक सभी तरह के प्रयास करने के बाद भी यूपीसीए को बीसीसीआई के लिए होने वाले चुनाव में प्रवेश नहीं मिल सका। यूपीसीए में नियमानुसार वार्षिक आम सभा (एजीएम) नहीं होने और आर्थिक गड़बड़ियों की शिकायत पर यह अधिकार छिना है। बीसीसीआई की 22 नवंबर की जारी लिस्ट में देश के 31 क्रिकेट क्लब शामिल किए गए लेकिन यूपीसीए का नाम नहीं जोड़ा गया है।

बीसीसीआई की वोटिंग में भाग नहीं लेने के सवाल पर जब निदेशक रियासत अली से बात की गई तो उन्होंने सचिव फहीम से पूछने की बात कह कर किनारा कर लिया। उन्होंने पहले कहा था कि बीसीसीआई की वोटिंग से पहले यूपीसीए का नाम आ जाएगा। फहीम से बात करने की कोशिश की तो उनका फोन बंद था।

यूपीसीए के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार कर दिया। जानकारों का कहना है कि यूपीसीए में सचिव और अध्यक्ष कार्यकारी हैं, इसलिए भी उनको बीसीसीआई की वोटिंग में भाग लेने का अधिकार नहीं है।

यूपीसीए के सदस्य राकेश मिश्रा ने कहा कि पहली बार बीसीसीआई की होने वाली वोटिंग से बाहर रहना अफसोसजनक है। इससे यूपी के क्रिकेटरों का मनोबल गिरेगा। इससे बीसीसीआई में प्रदेश की पकड़ कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ नियम से हो रहा होता तो आज यह नौबत नहीं आती।

यूपीसीए के नियमों के मुताबिक, निदेशक मंडल को किसी भी तरह के अधिकार हासिल नहीं है। इस संदर्भ में लोढ़ा समिति की गाइड लाइन में स्पष्ट निर्देश भी दिए हुए हैं। यूपीसीए में सारी पॉवर अपेक्स कमेटी को है। लेकिन 22 दिसंबर को होने वाली एजीएम बैठक के बारे में एपेक्स कमेटी के सदस्यों से कोई सलाह नही ली गई। इससे इतना तो साफ है कि यूपीसीए में बहुत कुछ ऐसा चल रहा है जो नियमानुसार नहीं है।

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