सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु देंगे मनवांछित फल

कानपुर/फैज़ान हैदर : हिंदू धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या तिथि को विशेष माना गया है। यह पुण्यदायी और प्रभावशाली होती हैं। वही हर मास आने वाली अमावस्या को पूजा पाठ करने से जातक के जीवन की परेशानियां दूर हो जाती है और पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। वही पंचांग के मुताबिक हर मास में एक अमावस्या तिथि आती है। ऐसे में पूरे साल में कुल मिलाकर 12 अमावस्या पड़ती हैं। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। स्नान, दान-पुण्य व देव दर्शन के लिए अहम मानी जाने वाली सोमवती अमावस्या का पुण्यकारी स्नान इस बार 12 अप्रैल को गंगा तटों पर होगा। रेवती नक्षत्र और मातंग योग में होने वाले स्नान पूजन से समस्त कष्टों का नाश होगा। सोमवती अमावस्या पर सुबह पांच से आठ बजे तक स्नान करने का विशेष मुहूर्त है।


इस बार सोमवती अमावस्या पर अमृत योग बन रहा है। गंगा स्नान करने के बाद दान और भगवान विष्णु का पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। इस दिन अखंड सौभाग्य और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए पीपल के वृक्ष पर दीप जलाकर 108 परिक्रमा करना लाभकारी माना जाता है। इससे समस्त कष्टों का विनाश होता है। माना जा रहा है कि अबकी बार कोविड के चलते जो श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए न जा पाएं, वे घर पर ही मिट्टी के पात्र में तुलसी दल, अक्षत, कुश, बेलपत्र डालकर स्नान करें तो उन्हें त्रिवेणी स्नान का फल मिलेगा। सोमवती अमावस्या पर इस बार कोविड के काले बादल छा सकते हैं। प्रशासन कोरोना केस की संख्या में वृद्धि होने के कारण इस पर रोक लगा सकता है।