उखड़ती सांसों को नहीं मिल रही ऑक्सीजन, किट व इंजेक्शन की भी होने लगी किल्लत

कानपुर/फैज़ान हैदर : शहर में कोरोना वायरस ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। संक्रमितों को बेड नहीं मिल रहे, जिन्हे बेड मिले भी हैं, उन्हे ऑक्सीजन नहीं मिल रही। जैसे तैसे ऑक्सीजन मुहैया हो भी रही तो अब सिलेंडर किट व दवाओं के लिए जद्दोजेहद शरू हो गया है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सांसें उखड़ती जा रही हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के ज़िम्मेदार अधिकारी सीएमओ कानपुर डॉ अनिल कुमार मिश्रा चैन की नींद सो रहे हैं। कानपुर में ऑक्सीजन के संकट के साथ अब ऑक्सीजन सिलेंडर की किट व दवाओं पर भी संकट गहराता जा रहा है। कोविड एवं अन्य निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी अब जानलेवा साबित हो रही है। आपदा में अवसर ढूंढ निजी अस्पताल संचालक तीमारदारों की जेब टटोलकर अब रोगियों को भर्ती कर रहे हैं।


शहर में बड़ी संख्या में संक्रमित होम आइसोलेशन में हैं। संक्रमित पेशेंट घरों में ही ऑक्सीजन पर सांसें जिंदगी काटने को मजबूर हैं, यदि ऑक्सीजन की डोर टूटी तो सांसें थमना निश्चित है। पूरे शहर में ऑक्सीजन सिलिंडरों की किल्लत है। बड़ी संख्या में लोग ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ इधर-उधर भटकते हुए नजर आ रहे हैं। वहीँ, निजी अस्पतालों में आज भी बेड खाली न होने का बहाना करके मरीजों को हैलट जाने के लिए कहा जा रहा है। ज़िम्मेदारों का कहना है कि शासन ने व्यवस्था कर दी है कि बिना कमांड सेंटर के प्रपत्र के ही निजी अस्पताल भर्ती करेंगे, पर व्यवस्था आज भी वैसी ही है। उन्नाव, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर और कन्नौज से भी गंभीर मरीजों को कानपुर भेजा जा रहा है। ऐसे में सरकारी और निजी अस्पतालों में कई गुना लोड बढ़ गया है।

मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़

कोविड अस्पतालों की बेड की व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं है। अब भी स्पष्ट नहीं रहता है कि किस अस्पताल में कितने बेड खाली हैं। रोगी भी अब हॉस्पिटलों के चक्कर काट आपनो की ज़िन्दगी बचनेक की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। वहीं कई को इलाज नहीं मिलने से उनकी जान भी जा रही है। ऑक्सीजन न होने से वेंटिलेटर बंद है। दौड़भाग के दौरान लोग अब सड़कों पर ही दम तोड़ रहे हैं। ऑक्सिजन, किट, दवाओं की कमी के चलते हालात बदतर बने हुए हैं। लेवल-3 एलएलआर अस्पताल और सभी सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सिजन और अब कीटों की किल्लत बानी हुई है। जिले में ऑक्सिजन सप्लाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने फोन बंद कर लिए हैं। वहीं कोविड कंट्रोल रूम से रेफरल के 2-3 दिन बाद तक निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।