PANCHAYAT ELECTION : वाह! नेताजी, बिना लड़े पटखनी देना कोई इनसे सीखे

कानपुर/विकास बाजपेयी : गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले–ये शेर न जाने कितने जंग में पसीना बहाने वाले लड़ाकों को लड़ने का जज्बा देता है लेकिन कानपुर के पंचायत चुनाव में हाथ आजमाने वाले कई नेता बिना शहसवारी के या कहें बिना लड़े ही सत्ता के सिंघासन पर काबिज हो गए। उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्यों के लिए हो रहे चुनाव कारनामों से भरे है।


कहीं सास और बहू की दिलचस्प लड़ाई है तो कहीं जेठानी और देवरानी के बीच की चुनावी जंग। पंचायत चुनाव में कहीं मामला कांटे की टक्कर का है तो कहीं एकतरफा हालांकि इस पर भी प्रत्याशी विरोधियों की मान मनौव्वल के भी कोई हथकंडे हाथ से जाने नहीं दे रहे। बुधवार को कानपुर के पंचायत चुनाव में विरोधियों के खिलाफ प्रत्याशी पद से नाम वापसी का आखरी दिन था|जिसमे करीब 26 करामाती कहें या तिकड़मी ब्लाक विकास समिति के सदस्यों ने बिना लड़े ही जीत दर्ज कर ली हालांकि एक पखवाड़े के इंतजार के बाद ही सही इन सभी ग्राम पंचायत के माननीय नेताजी को 2 मई को मतगणना वाले दिन जीत का सरकारी प्रमाणपत्र भी सौप दिया जाएगा।

वैसे इन नेताजी की कुर्सी पर कब्जे की ये ख्वाइस पूरी इसलिए पूरी हुई क्योंकि उनके विरोधियों ने नेताजी की हनक के आगे घुटने टेक दिए और ऐन मौके पर लड़ने का इरादा छोड़कर नाम वापस लेना ही उचित समझा। वैसे यदि पूछा जाए कि जब नाम ही वापस लेना था तो लड़ने की तैयारी क्यों की थी इसपर कई प्रत्याशियों की अलग अलग मजबूरी और अलग अलग बात लेकिन कल्याणपुर ब्लॉक के परगही क्षेत्र पंचायत सीट से अपने विरोधी के खिलाफ नाम वापसी की घोषणा करने वाले शिवम तिवारी का कहना है कि एक ही परिवार से कई प्रत्याशियों के विरोध में उतारने से सामाजिक प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है इसलिए परिवार हित में उन्होंने अनुराधा अवस्थी के खिलाफ नाम वापस ले लिया।

शिवम तिवारी के साथ आदित्य सिंह और माया शुक्ल ने भी इस सीट से पर्चा दाखिल किया था और सभी ने कमोबेश संबंधों और पारिवारिक कारणों का हवाला दे कर नाम वापस ले लिए और इससे अनुराधा अवस्थी निर्विरोध निर्वाचित हो गई और उनको मतगणना वाले दिन जीत का सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा| हालांकि अनुराधा कोई अकेली खुशकिस्मत नहीं हैं जिनके सर बिना लड़े जीत का सेहरा सजा है। ऐसे करीब 23 प्रत्याशी है जिनको बिना लड़े ही विजेता घोषित किया जाएगा।

इसमे सबसे अधिक 7 बीडीसी प्रत्याशी बिल्हौर ब्लॉक के है 16 ऐसे ही दूसरे प्रत्याशी है जो 8 अन्य ब्लॉक से निर्विरोध निर्वाचित हुए है वही ककवन ब्लॉक में ऐसा कोई भी बीडीसी प्रत्याशी नहीं रहा जिसके सर बिना लड़े जीत का सेहरा बंध सकता। कानपुर के 10 ब्लॉकों में 15 अप्रेल को मतदाता अपने ग्राम क्षेत्र के भावी नेताजी के चुनाव करने के लिए मत डालेंगे तो 2 मई को प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होना है। इन दस ब्लॉकों में सबसे ज्यादा 716 ग्राम प्रधान प्रत्याशी घाटमपुर ब्लॉक से है, तो सरसौल ऐसा ब्लॉक है जिसमे सबसे अधिक 456 बीडीसी प्रत्याशी मैदान में हैं, तो ककवन ब्लॉक में सबसे कम 146 उम्मीदवार ही मैदान में खड़े है।