पंचायत चुनाव पर मंडरा रहा कोरोना का खतरा, फिर बढ़ सकती है तारीखे

स्टेटडेस्क/आशुतोषत्रिपाठी : उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के रोगियों की सख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश में संक्रमित होने वालों की संख्या 8 हजार के पार हो चुकी है। सोशल मीडिया के जरिये इस बात की मांग उठाया जा रहा है कि कोरोना को रोकने के लिए पंचायत चुनाव को टाल दिए जाएं। पंचायती राज विभाग के अफसरों से जब इस मसले पर बात की गयी कि क्या पंचायत चुनाव फिलहाल स्थगित किये जा सकते हैं। इसके जवाब में पंचायती राज विभाग में उपनिदेशक और चुनाव के नोडल अफसर आरएस चौधरी ने चुनाव स्थगित करने की मंशा को खारिज कर दिया। वही सोशल मीडिया पर ये सवाल उठ रहा है कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच क्या यूपी में पंचायत चुनाव ज़रूरी हैं।


जब दुनिया कोरोना से लड़ रही है। तब हम चुनाव लड़ रहे है। कुछ साल बाद कोरोना काल को हम इस तरह याद करेंगे। बड़ी संख्या में लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। कुछ ने समर्थन किया तो कुछ ने कहा कि चुनाव के बिना गांवों में विकास कार्य रुके हैं। ऐसे में चुनाव होने चाहिए। वही सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि चुनावों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। इस तरह की बहस व जिज्ञासा और आशंका लगातार कई दिनों से चल रही है। आरएस चौधरी ने कहा कि एक्ट में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे चुनाव को 6 महीने से ज्यादा टाला जा सके। अब चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है इसे और टाला नहीं जा सकता है। बता दें कि संयुक्त प्रांत पंचायती राज एक्ट 1947 में चुनाव को सिर्फ एक बार 6 महीने के लिए टालने का प्रबंध है। एक्ट की धारा 12 की उपधारा 3-क में इस बात की व्यवस्था की गई है।

यदि कोई विषम परिस्थितिय हो तो सरकार चुनाव को सिर्फ 6 महीने के लिए आगे बढ़ा सकती है। बता दें कि योगी सरकार ने पहले ही 24 दिसम्बर 2020 को एक शासनादेश जारी करके चुनाव को 6 महीने के लिए टाल दिये थे। तब कोरोना को ही कारण बताया गया था। जो चुनाव अभी हो रहे हैं उसे दिसंबर तक पूरा हो जाना चाहिए था। 25 दिसंबर 2020 को ही पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। सरकार ने 6 महीने के लिए प्रशासक नियुक्त किया हुआ है। अब एक्ट के मुताबिक एक बार का मिलने वाला मौका सरकार ले चुकी है। ऐसे में अब उसके पास चुनाव को और टालने का कोई रास्ता नहीं है। जानकार बताते हैं कि सरकार के पास अभी भी एक ब्रह्मास्त्र है। जिसके प्रयोग से सारे नियम-कानून छोटे साबित हो जाएंगे। जानकर बताते है कि ऑर्डिनेन्स या अध्यादेश के जरिये सरकार राज्य से जुड़े किसी भी कानून में बदलाव कर सकती है।

मौजूदा पंचायती राज कानून के अनुसार चुनाव 6 महीने से ज्यादा नहीं टाले जा सकते हैं। हालांकि सरकार एक्ट में ही संशोधन कर दे तो रास्ता निकल सकता है। एक्ट में संशोधन करने के लिए सरकार को अध्यादेश लाना पड़ेगा। अध्यादेश पर राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही पंचायत चुनाव टले जा सकते है। जब विधानसभा का सत्र चालू होगा तब सरकार इस संशोधन को दोनों सदनों से पास कराकर इसे फिर से परमानेंट करा सकती है। हालांकि कि पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन हो चुका है। 15 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है। दूसरी तरफ कोरोना का संक्रमण भी हर रोज नई ऊंचाइयां छू रहा है। 8 अप्रैल को यूपी में कुल 8490 नये मामले सामने आए। यह संख्या हर रोज तेजी से बढ़ ही रही है। प्रदेश के प्रमुख शहर लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर में तो बेहद खतरनाक दर से संक्रमण फैल रहा है। इसे देखते हुए कई शहरों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू भी लगा दिया गया है।