अधिकारियों व दलालो की सक्रियता पर चल रहा एआरटीओ कार्यालय

उन्नाव/शिवम शुक्ला : उपविभागीय परिवहन कार्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाएं किसी से छिपी नहीं है। जिला प्रशासन की अनदेखी से दलालो और आरटीओ आफिस में तैनात जिम्मेदारो के हौसले बुलंद है। लाइसेंस से लेकर फिटनेस तक बिना सुविधा शुल्क के कोई कार्य नहीं किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को अपना लाइसेंस बनवाना है तो मौजूद अधिकारी कर्मचारी तमाम औपचारिकता बताकर गुमराह कर देते है और अंततः व्यक्ति गुमराह होकर दलालो के आगे नतमस्तक हो जाता है और सुविधा शुल्क के जरिये आगे का काम होता है।


गौरतलब है कि सुविधा शुल्क अधिकारी से लेकर कर्मचारियों तक में बांटा जाता है। इस खेल का मास्टरमाइंड कोई और नही बल्कि स्वयं वहां तैनात आरआई व एक बाबू है जो कि पूरे खेल को दलालो के जरिये संचालित करता है। आम जनमानस अपने काम करने के लिए एक पटल से दूसरे पटल पर भटकता रहता है। काम न हो पाने की दशा में मजबूरन दलालो के द्वारा मोटी रकम देकर कार्य कराना पड़ता है। इन सबके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की कुंभकर्णी निद्रा टूटने का नाम नहीं ले रही है।

कैसी खेलते है अधिकारी व दलाल आरटीओ ऑफिस में खेल
ड्राइविंग लाइसेंस की फीस 1350 रूपए है मगर लोगो से 45 सौ से 5 हजार तक वसूले जाते है। इसी तरह कामर्शियल वाहन के ट्रांसफर में 5 हजार की फीस पर 4000 से 4500 तक बंधा है। फिटनेस के लिए छोटा वाहन, बड़ा वाहन 600-800 की फीस है। मगर जनता से 3500 से 4500 तक वसूले जाते है। एनओसी लेने के 4 हजार रूपए खर्च करने पड़ते है।