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उन्नाव जिला पंचायत अध्यक्ष में भाजपा ने बाजी मारी

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  • स्व.अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह नयी जिला पंचायत अध्यक्ष
  • अरुण सिंह 9 वोटों से हारे, सांसद व दोनों विधायकों की किरकिरी
  • सांसद सच्चिदानंद साक्षी ने तो अरुण माला तक पहना दिया था
  • अरुण बोले, प्रशासन ने मुझ जैसे भाजपा कार्यकर्ता को हरवाया

उन्नाव: जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी शकुन सिंह विजयी रहीं। उन्होंने मुकाबले में भाजपा बागी प्रत्याशी अरुण सिंह को नौ वोटों से पराजित कर दिया। अरुण को 19 वोट मिलें जबकि शकुन सिंह को 28 मिले। तीन वोट अवैध रहें। सपा प्रत्याशी मालती रावत को मात्र एक वोट मिला। समझा जाता है कि यह वोट उन्हीं का होगा। जिला पंचायत उन्नाव के सदस्यों की संख्या 51 है।

आज कुल हुए 53 जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटों में से उन्नाव का चुनाव कीलकांटे का माना जा रहा था। पर भाजपा प्रत्याशी ने इसे जीत लिया। उनकी राह में रोड़े अटकाने में उन्हीं की पार्टी के लोग बताए जाते हैं। इनमें भाजपा सांसद साक्षी महाराज, भाजपा के ही उन्नाव सदर विधायक पंकज गुप्ता और सफीपुर विधायक बम्बालाल दिवाकर तो खुलकर अरुण सिंह को जिताने की कोशिश में लगे थे। यही नहीं सांसद साक्षी महाराज ने दोपहर को अरुण सिंह को गदनखेड़ा स्थित अपने दफ्तर माला तक पहनाकर जीत का आशीर्वाद दिया था। मौके पर विधायक पंकज गुप्ता भी मौजूद थे।
बताते हैं कि इस चुनाव में दोनों ओर से बाजरा जमकर चला। वोटों की खरीदफरोख्त में मोटी रकम खरच हुई बतायी जाती हैं। सदर विधायक की बेहद करीबी सूत्र बताते हैं कि उन्होंने अरुण सिंह के लिए 27 वोट मैनेज किए थे जिसमें 17 तो एक साथ उन्होंने भेजे। ये सभी उनकी पेट्रोल टंकी से मतदान के लिए गाड़ियों से पहुंचे थे। दस वोटरों को पंकज ने अलग भेजा। बताते हैं कि इनमें से नौ टूटकर शकुन सिंह खेमे से जा मिले।

उन्नाव में हुए बेहद रोचक चुनाव भाजपा नेतृत्व की नाक का सवाल बन गया था। बताते चलें कि सबसे पहले माखी कांड के दागी रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं संगीता सेंगर का टिकट हुआ था पर बाद में विरोध के कारण उनकी जगह अरुण सिंह को उम्मीदवार बनाया गया। अरुण की उम्मीदवारी की पैरवी सांसद, सदर विधायक, सफीपुर विधायक ने की। प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल ने इनके कहने पर ही अरुण को प्रत्याशी की सहमति दी थी। लेकिन अरुण के पीछे भी माखी कांड का भूत हाथ धोकर लगा था। बाद में पूर्व एमएलसी स्व.अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह को प्रत्याशी घोषित किया गया। उधर सपा ने मालती रावत को प्रत्याशी घोषित किया। सदर विधायक मालती को निर्विरोध जितवाने के लिए लखनऊ में भाजपा कार्यालय तक ले गए। उन्हें लगा कि नेतृत्व उनकी बात मान जाएगा। पर ऐसा नहीं हुआ। उल्टे मालती रावत को उनकी पार्टी ने निकाल दिया। वह चुनाव से भी पृथक हो गयीं। उनके पति आयकर के बड़े अफसर हैं। मालती कहती हैं कि उनके पति की नौकरी पर आंच न आए इसलिए वह चुनाव से पृथक हो गयीं। यह दांव भी सदर विधायक पंकज गुप्ता का उल्टा पड़ने से वह फिर अरुण सिंह की ओर लौट आए।

इस बीच शासन के निर्देश पर सदर विधायक पंकज गुप्ता द्वारा पल्लवित पोषित डिवाइन सिटी प्रोजेक्ट की जमीनों की पैमाइश प्रशासन ने शुरू कर दी। हालांकि विधायक खुद को इससे अलग मानते हैं पर वह प्रशासन पर बराबर दबाव बना रहे। आरोप था ग्रामसमाज की जमीन का करीब 6 बीघा हिस्सा डिवाइन सिटी में मिला लिया गया था। बाद में पेनाल्टी भी लगायी गयी थी। भू-कब्जा की जांच एसडीएम को सौंपी गयी थी जिन्होंने कल ही रिपोर्ट डीएम को सौंप दी थी।

बताते हैं कि संपत्ति पर आंच आते देख अरुण के तगड़े वाले पैरोकार थोड़ा धीमे पड़े। बताया जाता है कि उन्नाव जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव का विवाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जानकारी में लाया जा चुका था। उन्नाव सीट मुख्यमंत्री की प्रिय सीटों में बतायी जाती है। शायद यही वजह है कि संगठन ने भरपूर मेहनत करके यह सीट भाजपा की झोली में डाल दी।

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