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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में UP पुलिस ने दाखिल की 1300 पन्नों की चार्जशीट, पढ़ें पूरी खबर

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स्टेटडेस्क। उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में चार किसानों के खिलाफ, दो बीजेपी कार्यकर्ताओं और ड्राइवर की हत्या के मामले में शुक्रवार को चार्जशीट दायर की। घटना 3 अक्टूबर की है और घटना में कुल 8 लोगों की मौत हुई थी। ये मामले में दूसरी चार्जशीट है। इस केस में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा भी आरोपी है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले में 1300 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। किसानों की पहचान गुरुविंदर सिंह, कमलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और विचित्रा सिंह के रूप में हुई है। इसमें से तीन किसानों को खिलाफ धारा 302, 143,147,148, 323, 325, 427 और 436 के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं विचित्रा सिंह के खिलाफ धारा 109, 427, 114, 436, 504 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने कोर्ट में जमा किए सबूत :
मामले में 3 अक्टूबर को अजय मिश्रा की गाड़ी से कुचलने के बाद चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी। इसके बाद हिंसा में तीन और लोगों की मौत हो गई थी। इसमें दो बीजेपी कार्यकर्ता और एक ड्राइवर शामिल थे। एक पुलिसकर्मी ने बताया कि जांच में बीजेपी कार्यकर्ता और ड्राइवर की मौत में तीन किसानों का सीधा संबंध पाया गया है। पुलिस ने वीडियो फुटेज, मोबाइल फोन और कॉल डिटेल के रूप में साक्ष्य कोर्ट में पेश किए हैं।

दर्ज की गई थी दो एफआईआऱ :
चार्जशीट में कहा गया है कि किसानों ने ड्राइवर औऱ बीजेपी कार्यकर्ताओं पर डंडो से जान से मारने की नियत से हमला किया और गाड़ी को आग लगाई। 3 अक्टूबर की घटना के बात दो एफआईआर दर्ज की गई थी। एक एफआईआर किसान जगजीत सिंह द्वारा दर्ज कराई गई थी। जिसमें आशीष मिश्रा और अन्य अज्ञात लोगों का नाम था। वहीं दूसरी एफआईआऱ बीजेपी कार्यकर्ता सुमित जयसवाल द्वारा अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी।

वहीं पुलिस ने दूसरी एफआईआर में सात सात लोगों को पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। इसमें से तीन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले और उन्हें छोड़ दिया गया है। एसआईटी द्वारा घटना को सुनियोजित पाए जाने के बाद कोर्ट ने एफआईआर में हत्या का प्रयास, शस्त्र अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं को भी जोड़ा था।

वहीं 3 जनवरी को भी एसआईटी ने आशीष मिश्रा और 13 अन्य के खिलाफ 5 हाजर पन्नों की चार्जशीट दायर की थी। इसमें हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य आरोप लगाए गए थे। जांचकर्ता ने आशीष मिश्रा पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया औऱ कहा कि जब हिंसा हुई तो वो मौके पर मौजूद थे। जबकि मंत्री और उनके बेटे ने कहा था कि वो उस दिन घटनास्थल के पास नहीं थे।

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