H3N2 वायरस से लड़ने के लिए शिशु का स्वस्थ रहना जरूरी, मां का दूध ही बनेगा नवजात की ढाल

नालंदा

— बच्चों एवं उम्रदराज लोगों को है अधिक सावधान रहने की जरूरत
–बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी है उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करना

Biharsharif/Avinash pandey: नालंदा जिला सहित पूरे राज्य में एच3एन2 वायरस के संभावित संक्रमण प्रसार से निपटने के लिए तैयारी चल रही है। ऐसे में बच्चों का पूरा ख्याल रखना बेहद जरूरी है। नवजात अपनी हर जरूरत के लिए अपनी माता पर निर्भर रहता है और ऐसे में संक्रमण से नवजात को बचाने की जिम्मेदारी ख़ास कर मां की होती है। इस समय नवजात एवं बच्चों का खास खयाल रखना जरूरी है। बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी है कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए और शिशुओं के लिए स्तनपान इसका सबसे सुगम और सुरक्षित साधन है। नवजात बच्चों के लिए तो मां का दूध सुरक्षा कवच और किसी अमृत से कम नहीं है।

बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए खतरनाक है वायरस
एच3एन2 वायरस का बच्चों और अधिक उम्र के लोगों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है। यह माना जा रहा है कि मजबूत प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चे अथवा कोई भी व्यक्ति संक्रमण से सुरक्षित रह सकते हैं। ऐसे व्यक्ति अथवा बच्चे ज्यादा तेजी से संक्रमण को मात देकर स्वस्थ हो सकते हैं। इसका बड़ा कारण बच्चों को मां के दूध से मिलने वाला पोषण है, जो उनके प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। चिकित्सकों के अनुसार मां के दूध में फैट, शुगर, पानी और प्रोटीन की सही मात्रा होती है, जो शिशु की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। वहीँ उम्रदराज व्यक्ति सावधानी बरतकर और अपने दिनचर्या को संयमित कर संक्रमण से सुरक्षित रह सकते हैं।

मां के दूध में प्रचुर मात्रा में एंटीबॉडीज
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बिजय कुमार सिंह ने बताया कि संक्रमण से नवजातों के बचाव के लिए मां का दूध काफी सहायक सिद्ध हो सकता है। मां के दूध में वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रचुर मात्रा में एंटीबॉडीज होती है। यह एंटीबॉडीज वायरस या बैक्टीरिया को नाक, गले और आंतों में घुसने नहीं देता। मां के दूध में मौजूद मेक्रोफेज, लाइसोजाइम के साथ ही कॉम्पलिमेंट मौजूद होते हैं। इन सभी गुणों के कारण मां का दूध शिशु का प्रथम टीकाकरण भी माना जाता है। इसलिए जरूरी है कि माताएं अपने शिशु को कम से कम छह माह तक अपना दूध पिलाएं।

मां के दूध से मजबूत होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
मां का दूध बच्चों के शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान निभाता है। इससे बच्चे की इम्यूनिटी भी मजबूत होती है, जो बड़े होने तक उसका साथ निभाती है। बच्चे के पैदा होने के बाद कोलोस्ट्रम, जो मां का पहला दूध ब्रेस्ट में बनता है। वहीं दूध बच्चे को डायरिया, चेस्ट इन्फेक्शन और दूसरे रोगों से बचाता है। मां के दूध में फैटी एसिड मौजूद होता है, जो बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट में भी मददगार साबित होता है।