Budget 2026: बजट 2026 से पहले Tata Motors और Mercedes ने सरकार से क्या अपील की है? आइए जानते हैं…

दिल्ली बिजनेस

सेंट्रल डेस्क। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट से पहले ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने सरकार के सामने अपनी अहम मांगें रख दी हैं. देश की बड़ी ऑटो कंपनियां चाहती हैं कि बजट में ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे इलेक्ट्रिक व्हीकल और प्रीमियम कार सेगमेंट दोनों को मजबूती मिल सके. Tata Motors और Mercedes-Benz जैसी कंपनियों ने साफ तौर पर अपनी प्राथमिकताएं सरकार के सामने रखी हैं. आइए विस्तार से जानते हैं.

Tata Motors की ये है मांग :

Tata Motors ने बजट 2026 को लेकर सरकार से मांग की है कि शुरुआती स्तर की इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए खास मदद दी जाए. कंपनी के पैसेंजर व्हीकल्स के MD और CEO शैलेश चंद्रा ने कहा है कि सरकार के कुछ फैसलों से कार बाजार को फायदा मिला है, लेकिन सस्ती इलेक्ट्रिक गाड़ियां अब भी मुश्किल में हैं.

उन्होंने बताया कि GST में बदलाव, रेपो रेट में कटौती और टैक्स सिस्टम में सुधार से पेट्रोल और डीज़ल कारें सस्ती हुई हैं. इससे लोग पेट्रोल कार ज्यादा खरीद रहे हैं. ऐसे में कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए ग्राहकों को आकर्षित करना मुश्किल हो गया है. शैलेश चंद्रा का मानना है कि अगर सरकार बजट 2026 में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए कोई खास मदद देती है, तो ज्यादा लोग EV खरीदने के लिए आगे आएंगे.

इससे देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है और भविष्य में साफ-सुथरी गाड़ियों को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही Tata Motors ने कमर्शियल इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर भी अहम मांग रखी है. शैलेश चंद्रा के अनुसार, कमर्शियल EVs कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री का सिर्फ 7 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल यात्री किलोमीटर में इनका योगदान 33 से 35 प्रतिशत तक है.

उन्होंने कहा कि एक कमर्शियल कार आम यात्री कार की तुलना में लगभग 5 गुना ज्यादा चलती है. पहले ये गाड़ियां FAME-2 स्कीम में शामिल थीं, लेकिन PM E-Drive योजना से बाहर रह गईं. Tata Motors चाहती है कि सरकार इन्हें भी इस योजना में शामिल करे, जिससे पर्यावरण और Oil imports दोनों पर सकारात्मक असर पड़े.

Mercedes-Benz की है मांग :

Mercedes-Benz India ने बजट 2026 में इंपोर्टेड लग्जरी कारों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को तर्कसंगत बनाने की मांग की है. कंपनी के CEO संतोष अय्यर का कहना है कि इस समय 40,000 डॉलर से कम कीमत की इंपोर्टेड कारों पर 70 प्रतिशत और इससे महंगी कारों पर 110 प्रतिशत तक कस्टम ड्यूटी लगती है. उनका मानना है कि अगर इसे एक समान स्लैब में लाया जाए, तो लग्जरी कार सेगमेंट में मांग बढ़ेगी और सरकार के टैक्स रेवेन्यू में भी इजाफा होगा.

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