Padma Awards 2026 : केंद्र सरकार 131 लोगों को पद्म पुरस्कारों से करेगी सम्मानित, बिहार की तीन दिग्गज हस्तियों के नाम भी शामिल

दिल्ली राष्ट्रीय

बीपी डेस्क। केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया है. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण देने का ऐलान हुआ है. उनके सामाजिक क्षेत्र में काम को देखते हुए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा. फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र को भी मरणोपरांत पद्म विभूषण पुरस्कार देने की घोषणा की गई है. इसके अलावा गायिका अलका याग्निक, उत्तराखंड के पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी, अभिनेता ममूटी को पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा.

फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र को भी मरणोपरांत पद्म विभूषण पुरस्कार देने की घोषणा की गई है. इसके अलावा गायिका अलका याग्निक, उत्तराखंड के पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी, अभिनेता ममूटी को पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा. कल्लीपट्टी रामासामी पलानीस्वामी, डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु, पीयूष पांडे (मरणोपरांत), एसकेएम मैइलानंदन, शतावधानी आर. गणेश, उदय कोटक, वीके मल्होत्रा ​​(मरणोपरांत), वेल्लापल्ली नटेसन, विजय अमृतराज को पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा. साल 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कार देने की मंजूरी दी है, जिसमें पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं.

पुरस्कार पाने वालों में उन्नीस महिलाएं भी हैं, जबकि इस लिस्ट में विदेशी नागरिकों, अनिवासी भारतीयों (NRI), भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) और भारत के प्रवासी नागरिकों (OCI) की श्रेणी में छह लोग भी शामिल हैं, साथ ही 16 लोगों को मरणोपरांत सम्मानित किया गया है.

वहीं बिहार की तीन बड़ी हस्तियों भरत सिंह भारती, विश्व बंधु (मरणोपरांत) और गोपाल जी त्रिवेदी को पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है. इन तीनों ने जड़ों से जुड़े रहकर कला, संस्कृति और विज्ञान को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इनके नाम की घोषणा हुई है.

पद्म श्री पुरस्कार पाने वालों के बारे में जानिए
भरत सिंह भारती: भोजपुरी लोकगायक भरत सिंह भारती को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है. पिछले 6-7 दशकों से भोजपुरी गीतों को समर्पित भारती 1962 से ही आकाशवाणी पटना से जुड़े हुए हैं. उन्होंने भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिसिर की गायकी को जीवित रखा है. पंजवार में लागल भोजपुरिया बाजार और पानी के पियासल हिरना जैसे उनके गीतों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया. उनकी सादगी भरी गायकी ग्रामीण परिवेश और भावनाओं को बखूबी बयां करती है. लोकगीतों की इस धरोहर को सहेजने और उसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में उनका योगदान बड़ा है.

विश्व बंधु: लोक नृत्य के पुरोधा पटना में 23 नवंबर 1930 को जन्मे विश्व बंधु बिहार में लोक नृत्य का बड़ा चेहरा हैं. उन्होंने गुरु उदय शंकर से नृत्य सीखा और अपनी पूरी जिंदगी इसे ही समर्पित कर दी. उन्होंने डोमकच जैसे पुराने नृत्यों को मरने से बचाया और सुरांगन नाम की संस्था बनाकर हजारों गरीब बच्चों को मुफ्त में डांस सिखाया. खास बात यह है कि उन्होंने नृत्य के जरिए समाज को जागरूक किया- चाहे वह दहेज प्रथा हो या पढ़ाई-लिखाई का महत्व. कला के प्रति उनका जुनून इतना था कि उन्होंने नृत्य के जरिए समाज को जागरूक किया- चाहे वह दहेज प्रथा हो या पढ़ाई-लिखाई का महत्व. कला के प्रति उनका जुनून इतना था कि उन्होंने अपनी सरकारी शिक्षक की नौकरी तक छोड़ दी थी.

गोपाल जी त्रिवेदी: किसानों के मददगार डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में बिहार का मान बढ़ाया है. एक बड़े कृषि वैज्ञानिक और प्रशासक के तौर पर उन्होंने ऐसी तकनीकें विकसित कीं, जिनसे किसानों की पैदावार बढ़ी और उनकी आमदनी में सुधार हुआ. उन्होंने लैब में होने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाने का काम किया है.

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