- महिलाओं को दे रही सही पोषण का सही ज्ञान
- छोटी कोशिश से बड़े बदलाव की ओर कदम
बीपी डेस्क। गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए सही पोषण बेहद जरूरी होता है। बिहार के गांवों में महिला जनप्रतिनिधि व वार्ड सदस्याएं अब इस जिम्मेदारी को बड़ी तत्परता से निभा रही हैं। वे गांव की महिलाओं को सभाओं, बैठकें और घर-घर भ्रमण के माध्यम से जागरूक कर रही हैं। खुद की और आने वाले बच्चे की देखभाल, नियमित स्वास्थ्य जांच, पंजीकरण व पोषण युक्त आहार के बारे में सही जानकारी दी जा रही है।
केस 1: सरिता देवी का जागरूकता अभियान
शेखपुरा जिले के अरियरी प्रखंड के हजरतपुर मड़रो में जनप्रतिनिधि सरिता देवी सीमित शिक्षा के बावजूद समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। वार्ड संख्या 3 की जनप्रतिनिधि ने गर्भवती महिलाओं और अन्य महिलाओं के बीच यह संदेश मजबूती से पहुंचाया कि प्रसव पूर्व चार जांच (एएनसी), संस्थागत प्रसव, जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध और छह महीने बाद पूरक आहार शुरू करना आवश्यक है। वे अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए नियमित रूप से महिलाओं को जागरूक कर रहीं हैं।
केस 2: किशोरी देवी गांव की पोषण सखी
पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी प्रखंड की रुलही पंचायत के धर्मुहा गांव की किशोरी देवी पहली बार वार्ड सदस्या चुनी गई हैं। तीसरी कक्षा तक की शिक्षा पाने के बावजूद वो आज गांव की पोषण सखी बन चुकी हैं। एक बैठक के दौरान उन्हें पता चला कि तीन महीने की गर्भवती महिला ने अभी तक अपनी स्वास्थ्य जांच और पंजीकरण नहीं कराया है। उन्होंने तुरंत स्थानीय आशा कार्यकर्ता से संपर्क कर महिला को एंटीनेटल केयर (एएनसी) कराने का प्रबंध किया।
किशोरी देवी नियमित रूप से आंगनवाड़ी केन्द्रों का भ्रमण, गोद भराई और अन्नप्राशन दिवस जैसे कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लेती हैं। सभी प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों पर हो और जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराना भी सुनिश्चित कर रहीं हैं। किशोरियों के बीच संतुलित आहार, एनीमिया की रोकथाम, माहवारी स्वच्छता, हाथ धोने और साफ-सफाई भी नियमित चर्चा के विषय हैं।
केस 3: सुनीता देवी की कुपोषण पर जीत
मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड के चांदपरना ग्राम पंचायत में वार्ड नंबर 7 की वार्ड सदस्या सुनीता देवी ने कुपोषण के खिलाफ जंग छेड़ रखी है। यहां 28 वर्षीय गीता देवी की दो वर्षीय जुड़वां बच्चियां कुपोषण की शिकार थीं। गर्भावस्था के दौरान सही पोषण की कमी और नियमित जांच न करवाने से दोनों बच्चियां चल नहीं पा रही थीं। वार्ड सदस्या ने बच्चियों को मीनापुर सरकारी अस्पताल में जांच कराया और आगे के उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआसी) भेजा।
इस घटना के बाद सुनीता देवी ने पूरे वार्ड में युद्ध स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने महिलाओं, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाव के उपाय, पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेने पर जोर दिया।
आयरन-कैल्शियम की गोलियां, चार एएनसी जांच और नियमित वजन-बीपी जांच के लिए एएनएम दीदी से संपर्क करने की सलाह दी। उनकी मुहिम से न सिर्फ दो बच्चों की जान बची, बल्कि पूरे वार्ड के कई परिवारों को कुपोषण से बचने का सही रास्ता मिल गया।
