बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा की ओर से सूर्य कुमार शर्मा ने दाखिल किया नामांकन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई नेता रहे मौजूद

पटना

बीपी डेस्क। बीजेपी की आत्मा कार्यकर्ताओं में बसती है, यह आज सूर्य कुमार शर्मा उर्फ अरविंद शर्मा के नामांकन और उस नामांकन में कई दिग्गजों की ‘V’ साइन उंगलियां बताती है। एक तरह से यह उंगलियां दिखाना यह बता गई कि सूर्य कुमार शर्मा निर्विरोध जीत के रथ पर सवार हो चुके हैं।

लेकिन इनकी प्रत्याशी के रूप में घोषणा और नामांकन के बाद एक प्रश्न आज भी जवाब मांग रहा है कि ये कौन है सूर्य कुमार शर्मा जो अरविंद शर्मा का चेहरा चमका गया।

वो कब सूर्य कुमार शर्मा से अरविंद शर्मा बने और अरविंद शर्मा बनकर ही रह गए। एमएलसी पद के लिए नामांकन का मसला सामने नहीं आया होता तो सूर्य कुमार शर्मा को कोई नहीं जान पाता।

चलिए जानते हैं उस रोचक किस्से को जहां से सूर्य कुमार शर्मा का सफ़र समाप्त और अरविंद शर्मा की यात्रा शुरू—

वह सुबह का समय था। दिन तो याद नहीं पर वर्ष 1974 का था जब देश इंदिरा गांधी के तानाशाही रवैया से नाराज हो कर सड़कों पर उतर आया था। क्या नौजवान, क्या बूढ़े और क्या बच्चे, सभी दीवाने थे। और सब के लिए काम थे। मेरी उम्र को देख कर मुझे चिट्ठी कह ले या फिर संदेश पहुंचाने हो तो मुझे भेजा जाता था। मेरे लिए भी यह काम रोमांच भरा था।

जब कोई चिट्ठी कहीं से कहीं ले जा रहा होता तो मुझे लगता कि सड़क किनारे खड़े लोग सारे लोग सरकार के खुफिया हैं और मुझे पकड़ने के लिए खड़े हैं। और तब मैं यह समझता था कि यह चिट्ठी इंदिरा गांधी के तानाशाही शासन की ताबूत का अंतिम कील साबित होगा। और मैं बचते बचाते जब गंतव्य पर चिट्ठी पहुंचा देता तो लगता था कि आज का दिन सार्थक हुआ।

गांधी मैदान के पास की जगह थी। मैं साइकिल चलाता वहां पहुंचा। चिट्ठी ली और गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दी। उस दिन आंदोलन से जुड़े 10 लोगों को चिट्ठी पहुंचानी थी। जब सारी चिट्ठियां पहुंचा कर लौट रहा था, कि गांधी मैदान के पास रोक लिया गया। मेरे अलावा और भी बच्चे थे। मुझे मामला समझते देर नहीं लगा।

मैने उनकी नजरें बचा कर कापी पर अरविंद शर्मा लिखा। और फिर सांस थाम कर बैठ गया। एक अधिकारी आए और एक-एक बच्चे से पूछने लगे सूर्या शर्मा कौन है। सबने कहा कि मेरा नाम ये हे या वो है। जब मेरी बारी आई तो मैने भी कहा कि मेरा नाम अरविंद शर्मा है।

और तभी वह खुफिया जोर से बोला, सर इसका नाम तो अरविंद शर्मा है। पुलिस की जुबान से पुकारा नाम उस दिन अरविंद शर्मा का जन्मदिन था। और फिर यही नाम चमकता गया और धीरे-धीरे मुझे भी यही अच्छा लगने लगा।

पद-प्रतिष्ठा के भूखे नहीं थे

तकरीबन तीन दशक से बीजेपी बीट देख रहे पत्रकारों का कहना है कि वो कभी भी अखबार में नाम या फिर बीजेपी अधिकारियों से पद की लालसा करते नहीं देखे गए।

जानकारी के मुताबिक
पटना युवा मोर्चा के अध्यक्ष
प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह के कार्यकाल में अरवल जिला के जिला प्रभारी बनाया
बीजेपी के फायर ब्रांड नेता ने नवादा जिला में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाया
सम्राट चौधरी जब प्रदेश अध्यक्ष थे तब अरविंद शर्मा को मुख्यालय / कार्यालय प्रभारी बनाया।

पार्टी के भीतर सम्मान देने और पाने में अरविंद शर्मा का कोई हाथ नहीं पकड़ सकता। आज भी तो अरविन्द शर्मा के नामांकन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी , जदयू कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे।