स्वच्छता और जल प्रबंधन में बिहार का डंका, 98 अंकों के साथ शीर्ष राज्यों में शामिल

पटना
  • अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एसडीजी सूचकांक पर चर्चा, निर्णय-निर्माण और नेतृत्व में महिला भागीदारी बढ़ाने पर जोर

बीपी डेस्क। नागरिकों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने और स्वच्छता के मामले में बिहार 98 अंकों के साथ देश के शीर्ष राज्यों में तीसरे स्थान पर है। यह रैकिंग सतत विकास लक्ष्य-6 (एसडीजी-6) के तहत नीति आयोग की ओर से वर्ष 2023-24 के लिए दी गई है। इसी के साथ बिहार ने अपने समग्र एसडीजी स्कोर को 2018–19 में 48 से बढ़ाकर 2023–24 में 57 कर लिया है।

इस उपलब्धि के बाद राज्य उम्मीदवारी से प्रदर्शक की श्रेणी में पहुंच चुका है। ये बातें रविवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर बतौर मुख्य अतिथि योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कही। उन्होंने कहा कि संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बावजूद एसडीजी सूचकांकों पर राज्य ने तीव्र गति से प्रगति की है।

यह सफलता बिहार में योजनाओं के सतत क्रियान्वयन और जेंडर संबंधी संतुलन की दिशा में सरकार के महत्वपूर्ण प्रयास से मिली है। पटना स्थित एलएन मिश्रा आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान के सभागार में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने जेंडर-संबंधी सूचकांकों, विशेष रूप से एसडीजी-5 (लैंगिक समानता) एवं संबंधित अन्य लक्ष्यों गरीबी-उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के सूचकांकों की स्थिति का आकलन करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के साथ निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में उनके नेतृत्व और भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीति बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
यूनिसेफ एक्सपर्ट मनोज नारायण ने पावरपॉइंट प्रजेंटेशन (पीपीटी) के सहारे एसडीजी सूचकांकों से उपस्थित अतिथि और महिलाओं को रूबरू कराया।

उन्होंने बताया कि बिहार ने 2018–19 से 2023–24 के बीच एसडीजी-5 (लैंगिक समानता) में अपने स्कोर में 20 अंकों की वृद्धि की है। यह प्रगति राज्य सरकार की कई नीतिगत पहलों के परिणामस्वरूप संभव हुई है।

मुख्य रूप से ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50 और सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के साथ मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना, ‘सात निश्चय’ पहल और जीविका जैसे कार्यक्रम प्रमुख रूप से शामिल हैं।

संवेदनशील समाज बनाने का संकल्प
कार्यशाला में महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने के लिए चल रही नीतियों- कार्यक्रमों को मजबूत करने से संबंधित कई सुझाव सामने आए। प्रतिभागियों ने बिहार में अधिक समावेशी, असमानता विहीन और जेंडर के प्रति संवेदनशील समाज बनाने के लिए मिलकर काम करने के अपने संकल्प को दोहराया।

साथ ही लिंग आधारित हिंसा, आर्थिक अवसरों की असमान पहुंच, महिलाओं के अवैतनिक केयर कार्यों की असमानता जैसी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया। चर्चा में अंतर विभागीय समन्वय, जेंडर-बजट, जेंडर-सेंसिटिव योजना-निर्माण और डाटा-आधारित नीतिगत हस्तक्षेप के महत्व पर बल दिया गया, ताकि राज्य में लैंगिक समानता से संबंधित किए गए पहल को और मजबूत किया जा सके।