शाहाबाद के प्रख्यात राजनीतिज्ञ एसएन प्रसाद की सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा कल

बक्सर

जीवन पर्यंत सीपीआई का दामन पकड़े रहे प्रसाद
निडर जुझारू और प्रतिभा के धनी थे

बक्सर, विक्रांत।
पुराने शाहाबाद के राजनीतिक इतिहास में चर्चित सत्यनारायण प्रसाद उर्फ दादा (एसएन दादा) का नाम काफी अदब से लिया जाता है। जीवन भर एक राजनीतिक दल सीपीआई का दामन थामे रहे। पर क्षेत्र के विकास के सवाल पर दिवंगत प्रसाद हर दल को नैतिक व बौद्धिक सर्मथन देने से कभी परहेज नहीं कर सके। इसके कई जीवंत उदाहरण है।

बक्सर को जिला का दर्जा, डुमरांव को अनुमंडल का दर्जा,महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना मलई बराज का निर्माण,डुमरांव में कृषि कालेज की स्थापना, व्यवहार न्यायालय की स्थापना सहित डुमरांव नगर के कई छोटी व बड़ी समस्या व विकास के सवाल को लेकर वे आंदोलन का शंखनाद करने में अहम भूमिका निभाई है।

वाम पंथ यानि सीपीआई के संगठन में जिला इकाई से लेकर प्रदेश कमिटि तक के विस्तार व संगठन को मजबूती प्रदान करने में अव्वल रहे। इनकी समर्पण ण व ईमानदारी पूर्वक पार्टी के कार्य करने की क्षमता का सीपीआई के राष्ट्रीय नेता भी कायल रहते थे। सीपीआई के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद तेजनारायण सिंह, पूर्व सांसद कामरेड नागेन्द्र ओझा के अलावा पूर्व सांसद सह पत्रकार रहे अली अनवर कहते है कि वयोवृद्ध सत्यनारायण प्रसाद के पास पुराने शाहाबाद क्षेत्र का भौगोलिक, सामाजिक एवं राजनीतिक ज्ञान का प्रचुर भंडार था।

अधिवक्ता सह साहित्यकार शंभू शरण नवीन कहते है कि दिवंगत एस एन प्रसाद प्रतिभा के धनी थे। पत्रकार अरूण विक्रांत कहते है दादा के पास क्षेत्र के भौगोलिक, ऐतिहासिक, राजनैतिक एवं सामाजिक तौर पर अनुभवी व्यक्ति थे. उन्हें डुमरांव विधान सभा क्षेत्र से सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका मिला था। अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पूर्व मुख्यमंत्री सरदार हरिहर सिंह से करीब एक हजार मतो के अंतर से सत्यनारायण प्रसाद चुनाव हार गए थे।

जीवन परिचय-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले सत्यनारायण प्रसाद का जन्म विगत 14 जनवरी वर्ष 1924 में हुआ है। डुमरांव नगर स्थित चौक रोड निवासी मां स्वर्गीय सिंहासनी देवी व पिता स्वर्गीय भागवत प्रसाद के अकेला संतान थे। हाला कि उनके एक छोटे भाई भी थे। पर उनका देहावसान बाल्यकाल में चुकी थी। दिवंगत सत्यनारायण प्रसाद उर्फ दादा के बड़े पिताजी दुर्गा प्रसाद सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे।

उनके बड़े पिता जी संतान विहीन थे। नतीजतन बड़े पिता जी का सानिध्य सत्यनारायण प्रसाद को मिला। बडे़ पिता जी के सानिध्य में रहने के चलते उनके अंदर सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर कार्य करने का जुनून बाल्यकाल में ही पैदा हो गया था। उन्होनें एमए की शिक्षा ग्रहण कर रखी थी।जीवन के चौथे पहर में पहुंचने एवं शारीरिक तौर पर अस्वस्थ रहने के बाद भी उनकी दिनचर्या अखबार के पढ़ने के साथ शुरू हो जाती थी।

सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धानंद तिवारी बताते है कि सत्यनारायण दादा अखबार के माध्यम से देश व दुनिया की खबरों के अलावा क्षेत्रीय खबरों पर पैनी नजर बनाए रखते थे. जरूरत के अनुसार विभिन्न अखबार के स्थानीय पत्रकारों के समक्ष प्रतिक्रिया देने से गुरेज नहीं करते थे। श्री तिवारी बताते है कि दिवंगत प्रसाद एक निडर, जुझारू और राजनीतिक रूप से अनुभवी व्यक्ति थे. दिवंगत सत्यनारायण प्रसाद उर्फ दादा की याद में द्वितीय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 26 अप्रैल को डुमरांव नगर परिषद के पुराने नगर भवन में होगा. सभा में राजनीतिक दिग्गजों की उमड़ेगी भीड़।