पीएम मोदी ने जनता से की अपील, कहा- भारत सोने का दुनिया में सबसे बड़ा आयातक देश, एक साल तक सोने की खरीद से बचना चाहिए…

दिल्ली

सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी संकट की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए लोगों से चीजों के इस्तेमाल में संयम बरतने की अपील की है. इसी अपील के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अगले एक साल तक सोने की खरीद से बचना चाहिए क्योंकि इसकी खरीद में भारी मात्रा में डॉलर का भुगतान करना पड़ता है जिसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है. अब सवाल उठता है कि भारत में आखिर कितना सोना होता है और पीएम ने जिस कॉपर को भविष्य का सोना करार दिया, उसकी क्या स्थिति है.

सोने को लेकर पीएम मोदी ने कहा था कि भारत सोने का दुनिया में सबसे बड़ा आयातक है. सरकार को सोना खरीदने के लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा का भुगतान करना पड़ता है. ऐसे में हमें एक साल के लिए सोने की खरीदारी को टाल देना चाहिए. ऐसा करके हम अरबों डॉलर की विदेश मुद्रा बचा सकते हैं.

इसी तरह उन्होंने कॉपर को लेकर भविष्य का सोना करार दिया. उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सोलर पैनल में कॉपर का अनिवार्य होता है. ऐसे में स्वदेशी खनन पर जोर देना चाहिए और विदेश से ज्यादा कॉपर खरीदने की जगह स्वदेशी पर जोर दिया जाए.

भारत में सोने की पैदावार कितनी है…
इस संबंध में इसी साल फरवरी में बीजेपी सांसद डॉक्टर हेमंत विष्णु सावरा ने केंद्र सरकार से सवाल किया था, जिसके जवाब में सरकार ने बताया कि पिछले 5 सालों में देश में सोने के उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई है. साल 2020-21 में भारत में सोने का उत्पादन 1127 किलोग्राम हुआ था जो अगले साल 2021-22 में बढ़कर 1407 किलोग्राम हो गया. 2022-23 में इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई और महज 26 किलो की बढ़ोतरी के साथ 1433 किलोग्राम हुआ था. जबकि साल 2023-24 में सोने के उत्पादन में यह आंकड़ा 1500 किलोग्राम से अधिक का पार कर गया. इस साल सोने का उत्पादन 1586 किलो हुआ था. 2024-25 में सोने का उत्पादन बढ़कर 1627 किलोग्राम हो गया.

28 गोल्ड, 11 कॉपर ब्लॉकों का आवंटन
केंद्र ने अपने जवाब में बताया कि सरकार ने अलग-अलग खनिज पदार्थें (जिनमें सोना और तांबा शामिल हैं) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. इसके तहत अन्वेषण लाइसेंस (Exploration Licence) व्यवस्था, जो अहम और गहराई वाले क्षेत्रों में खनिजों को लेकर शुरुआती सर्वेक्षण और खोज करने की अनुमति देती है.

राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट (National Mineral Exploration and Development Trust, NMEDT) से वित्तपोषण के साथ, अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों (NPEAs) द्वारा यह काम किया जाता है. सरकार का कहना है कि साल 2015 से लेकर अब तक 11 कॉपर ब्लॉकों और 28 गोल्ड ब्लॉकों की नीलामी की जा चुकी है.

कॉपर के उत्पादन में उतार-चढ़ाव
जहां तक कॉपर के उत्पादन की बात है, कॉपर ओर के उत्पादन और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक ‘पेस्ट फिल’ (Paste Fill) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. साल 2020-21 में जहां कॉपर का उत्पादन 108718 टन था वो 2021-22 में बढ़कर 115313 टन हो गया. 2022-23 में 112745 टन तो 2023-24 में 125230 टन हुआ था. हालांकि 2024-25 में यह उत्पादन घट गया और 105012 टन ही कॉपर का उत्पादन किया गया.

खान मंत्रालय (Ministry of Mines) के अंतर्गत आने वाले ‘हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड’ (HCL) कॉपर के खनन कार्य में लगा हुआ है, और इसने कॉपर ओर के उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए कई उपाय अपनाए हैं. हालांकि सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि HCL के विनिवेश (Disinvestment) का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.