बीपी डेस्क। बिहार में 2025-26 में एनएच की 52 परियोजनाओं के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 33464 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, लेकिन इनमें से केवल आधी दर्जन परियोजनाओं के लिए 4645 करोड़ रुपये के उपयोग की दिशा तय हो सकी है. इस बात का खुलासा रविवार को तब हुआ जब पथ निर्माण मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने 2025-26 की वार्षिक कार्ययोजना के तहत एनएच परियोजनाओं के डीपीआर निर्माण की प्रगति की समीक्षा की.
बहुत कम परियोजनाओं पर काम शुरू होने और आवंटित राशि में से मात्र 14 फीसदी राशि का उपयोग किये जाने पर मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल नाराज दिखे. दिलीप कुमार जायसवाल ने परियोजनाओं का साप्ताहिक प्रोग्रेस रिपोर्ट देने का निर्देश दिया, साथ ही कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. टाइमलाइन तय कर काम को पूरा करें.
इस समीक्षा बैठक का आयोजन पथ निर्माण विभाग के सभाकक्ष में किया गया था. इसमें पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के साथ विभाग के वरीय पदाधिकारी और अभियंतागण उपस्थित रहे.
समीक्षा बैठक के दौरान पथ निर्माण मंत्री को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अनीसाबाद-एम्स एलिवेटेड कॉरिडोर, विक्रमशिला सेतु, औरंगाबाद फोरलेन बाइपास, सिंहेश्वर बाइपास, अरवल से बिहारशरीफ सड़क सहित कई आरओबी के डीपीआर की जानकारी दी गयी. इस दौरान करीब 33 हजार 464 करोड़ रुपये की लागत की कुल 52 परियोजनाओं की डीपीआर की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया.
फिलहाल एनएच विंग द्वारा 36 परियोजना, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा 14 परियोजना और बीएसआरडीसीएल द्वारा दो परियोजनाओं का डीपीआर तैयार किया जा रहा है.
बैठक में पथ निर्माण मंत्री को अवगत कराया गया कि अरवल बाइपास फोरलेन, दाउदनगर बाइपास फोरलेन, मगरदेई घाट हाइ लेवल ब्रिज, एनएच-322, ढाका मोड़ से बलझोर सड़क, न्यू गंडक ब्रिज और समस्तीपुर से दरभंगा एनएच-322 परियोजना मंजूर हो चुके हैं. इनकी कुल राशि 4645 करोड़ रुपये है.
साथ ही, 15 फरवरी तक छह अन्य परियोजनाओं का डीपीआर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को भेज दिया जायेगा. समीक्षा के दौरान मंत्री ने परियोजनाओं के डीपीआर तैयार करने में आ रही बाधाओं को सभी संबंधित पदाधिकारियों से समन्वय स्थापित कर जल्द दूर करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि सड़क परियोजनाओं के अवरोधों के समाधान के लिए पीएमओ, मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया जायेगा.
अलाइनमेंट अप्रूवल, डीपीआर सबमिशन, स्क्रूटनी और मंत्रालय व आरओ सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को भेजने में देरी न हो. उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं हो इसका ध्यान रखा जाये. मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने राम जानकी मार्ग (मशरख-चकिया-भीठामोड़) के डीपीआर के लिए अलग से टीम लगाने का निर्देश दिया.
मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि 25 वर्ष आगे के समय को ध्यान में रखकर बाइपास का निर्माण कराया जाये. उन्होंने यह भी कहा कि बाइपास शहर से दूर हो और आबादी एवं यातायात को प्राथमिकता देते हुये इसका निर्माण करायें.
इसके साथ ही उन्होंने सभी अप्रूव्ड अलाइनमेंट वाली परियोजनाओं के डीपीआर को तत्काल अंतिम रूप देने का निर्देश दिया. इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित कार्यालयों या मंत्रालय को भेजने और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी गयी अलाइनमेंट पर फॉलोअप का निर्देश दिया.
उन्होंने पेंडिंग कम्प्लायंस या ऑब्जर्वेशंस को समयसीमा निर्धारित कर पूरा करने के लिए कहा. साथ ही बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड की परियोजनाओं के अवरोधों को दूर करने के लिए रेलवे से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया.
