बीपी डेस्क। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में आयोजित होने वाले राजकीय और अन्य महत्वपूर्ण मेलों के प्रबंधन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि मेलों का हमारे सामाजिक और आर्थिक जीवन में बड़ा महत्व है, इसलिए इनके आयोजन में पारदर्शिता और सुव्यवस्थित प्रबंधन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विभाग का उद्देश्य मेलों को समयबद्ध योजना और निर्धारित बजट के भीतर संपन्न कराना है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अब मेलों के नाम पर होने वाले अनियंत्रित खर्च को स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग ने पाया है कि कई जिलों द्वारा अंतिम समय में राशि की मांग की जाती है और विभागीय अनुमति के बिना ही खर्च कर दिया जाता है।
इस परिपाटी को खत्म करने के लिए विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि पूर्व निर्धारित नियमों का उल्लंघन कतई बर्दाश्त नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी मेले के शुरू होने से कम-से-कम दो महीने पहले संबंधित जिला समाहर्ता (DM) को संभावित मदवार व्यय विवरणी के साथ राशि आवंटन का प्रस्ताव विभाग को भेजना होगा।
विभाग ने पुराने पत्रांक का हवाला देते हुए कहा है कि देर से आने वाले प्रस्तावों और बिना अनुमति के सृजित की गई देनदारियों के कारण विभाग के समक्ष अनावश्यक कानूनी और वित्तीय संकट पैदा होते हैं, जिसे अब रोका जाएगा। विभाग ने जिला प्रशासन को कड़ा संदेश दिया है कि यदि विभाग द्वारा मांगी गई राशि से कम आवंटन स्वीकृत किया जाता है, तो जिला प्रशासन को उसी सीमा के भीतर मेला संपन्न कराना होगा।
स्वीकृत राशि से अधिक व्यय की स्थिति में विभाग अतिरिक्त फंड मुहैया नहीं कराएगा। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले किसी भी वित्तीय दायित्व या भुगतान के लिए संबंधित जिला स्वयं पूरी तरह जिम्मेदार होगा। अक्सर देखा गया है कि जिलों द्वारा अत्यधिक खर्च करने और भुगतान न होने पर संवेदक (ठेकेदार) न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समय पर प्रस्ताव भेजने और स्वीकृत बजट में कार्य करने से ऐसे अनावश्यक विवादों से बचा जा सकेगा। विभाग ने इस निर्देश की प्रति सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और अपर समाहर्ताओं को भेजते हुए वित्तीय अनुशासन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
