सेंट्रल डेस्क। भारत और यूरोपीय संघ ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए। इसे ‘अबतक का सबसे बड़ा समझौता’ बताया जा रहा है। यह समझौता भारत-यूरोपीय यूनियन रिश्तों में एक नए युग का शंखनाद है। इसके साथ ही भारत ने अमेरिका के साथ ही चीन और अन्य देशों को भी परोक्ष रूप से संदेश दिया है कि भारत की अनदेखी करना संभव नहीं है। इस समझौते से भारत ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि वह अपने हितों को सबसे आगे रखता है। साथ ही, वह किसी देश की एकतरफा दबाव या दादागिरी झेलने को मजबूर नहीं है।
भारत-यूरोप के बीच ट्रेड डील ऐसे समय हुई है जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 50 परसेंट टैरिफ लगाया हुआ है। US-इंडिया ट्रेड डील में देरी हो रही है। वहीं, यूरोप की तरफ से अमेरिका और चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और दूसरे क्षेत्रों के साथ अपने डिप्लोमेटिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने की कोशिश की जा रही है।
ईयू के साथ ट्रेड डील में भले ही 18 साल का समय लग गया हो लेकिन इससे अमेरिका को बिना कुछ कहे जी जवाब मिल गया है। वहीं, यूरोप और अमेरिका के बीच जिस तरह से खींचतान चल रही है उसमें इस डील का असर दूरगामी होगा। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक भारत-EU की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने पहले ही इस डील की आलोचना कर चुके हैं। बेसेंट ने कहा है कि यह अप्रत्यक्ष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध को फंड कर रही है।
यूनाइटेड स्टेट्स ने चेतावनी दी है कि यूरोप भारत के साथ डील पर साइन करके अपने ही खिलाफ ‘युद्ध’ को फाइनेंस कर रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अमेरिका के नाराज होने की मुख्य वजह यह है कि इस डील से भारतीय एक्सपोर्ट्स को फायदा मिल सकता है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से अमेरिका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों का मुकाबला करने और खासकर टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे सेक्टर्स को राहत मिलने की पूरी संभावना है।
वहीं शुरुआती झटकों के बाद, भारतीय एक्सपोर्टर्स संभल गए और दूसरे बाजारों में अपनी जगह बना ली। वहीं, कनाडा ने ईयू के साथ ट्रेड डील पर भारत का समर्थन कर ट्रंप पर इशारों-इशारों में निशाना साधा है। कनाडा के एनर्जी और नेचुरल रिसोर्स मंत्री टिम हॉजसन ने कहा कि यूरोपियन यूनियन के साथ भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट उन ग्लोबल दबंगों के लिए एक ‘परफेक्ट’ जवाब है जो टैरिफ और इकोनॉमिक इंटीग्रेशन को दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। हॉजसन ने कहा कि लंबे समय से इंतजार किए जा रहे इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों तरफ से जुड़ाव की पूरी दिशा में काफी विस्तार होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग के नए मौके खुलेंगे।
