तीन दिवसीय खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन

बक्सर

विक्रांत। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम (खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य महिला किसानों को खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों में दक्ष बनाकर आत्मनिर्भरता एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम दो दिनों में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर परिसर में खाद्य विज्ञान एवं पोस्टहार्वेस्ट टेक्नोलॉजी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अनित कुमार, इंजीनियर कुमार संदीप, श्रीमती कंचन कुमारी एवं डॉ. प्रेम प्रकाश द्वारा महिला किसानों को कुकीज़, प्याज पाउडर तथा आलू चिप्स के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न आधुनिक मशीनों एवं तकनीकों के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का तीसरा दिन बिरनौध गाँव, प्रखंड गोराडीह, जिला भागलपुर में आयोजित किया गया, जहाँ महिला किसानों को प्याज पाउडर एवं आलू चिप्स निर्माण का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में महिलाओं ने मशीन स्तर के साथ-साथ घरेलू स्तर पर भी खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों को सीखा, जिससे वे अपने घर से ही लघु उद्योग स्थापित कर सकें।

कार्यक्रम के दौरान फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. एस. के. पाठक ने महिला किसानों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के प्रधान अन्वेषक (PI) डॉ. रामानुज विश्वकर्मा एवं सह-प्रधान अन्वेषक (Co-PI) डॉ. विजय कुमार सिंह ने भी महत्वपूर्ण सुझाव देकर प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया।

यह संपूर्ण कार्यक्रम बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को औद्योगिक एवं घरेलू दोनों स्तरों पर सशक्त बनाते हैं, जिससे वे न केवल नई तकनीकों को सीखती हैं बल्कि अपनी आय में भी वृद्धि कर सकती हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया।

इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम से महिला किसानों में उत्साह देखने को मिला और उन्होंने भविष्य में खाद्य प्रसंस्करण को आय के सशक्त स्रोत के रूप में अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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