बीपी डेस्क। कृषि मंत्री, बिहार श्री राम कृपाल यादव द्वारा आज बामेती, पटना के सभागार में “बिहार में प्रगतिशील एवं लाभकारी कृषि पद्धतियाँ” विषय पर आयोजित विशेष कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विकास आयुक्त, बिहार, श्री मिहिर कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री नर्मदेश्वर लाल, प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार ने किया।
इस अवसर पर भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर) के प्रख्यात प्रोफेसर पद्म श्री डॉ॰ अशोक गुलाटी द्वारा मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें कृषि क्षेत्र की भावी रणनीतियों एवं संभावनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला गया।
कृषि मंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार में कृषि के बदलते परिदृश्य, बाजार की माँग तथा किसानों की आय वृद्धि के लिए आवश्यक रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।
धान एवं गेहूँ के उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के पश्चात अब राज्य की कृषि विकास नीति को दलहन, कैश क्रॉप एवं हाई-वैल्यू फसलों के उत्पादन तथा उनके निर्यात की दिशा में केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कृषि के विविधीकरण के माध्यम से किसानों की आय में सतत एवं संरचित वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कार्ययोजना पर चर्चा की गयी।
मंत्री ने कहा कि दलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा बिहार को 97 करोड़ रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है। राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति कार्यक्रम के माध्यम से देशव्यापी स्तर पर दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें बिहार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बिहार दलहन उत्पादन में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थान प्राप्त करे। इसके साथ ही, हाई-वैल्यू एवं कैश क्रॉप को बढ़ावा देने के लिए जिलावार फसल चक्र की वैज्ञानिक रूपरेखा तैयार करने पर भी बल दिया गया। स्थानीय जलवायु, मृदा की गुणवत्ता तथा बाजार की मांग के अनुरूप फसल नियोजन से उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि संभव है, जिससे निर्यात की संभावनाएँ सुदृढ़ होंगी।
उन्होंने कहा कि कृषि रोड मैप के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में उत्पादन, उत्पादकता, विविधीकरण एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता के साथ फल, सब्जी, बागवानी, मखाना, शहद एवं अन्य उच्च मूल्य फसलों में बिहार ने विशिष्ट पहचान बनाई है।
विकास आयुक्त, बिहार, श्री मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि राज्य की कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए एरिया-स्पेसिफिक एवं जोन-स्पेसिफिक खेती की स्पष्ट रणनीति अपनानी होगी। प्रत्येक जिले की मृदा संरचना, जल उपलब्धता और जलवायु के अनुरूप फसलों का वैज्ञानिक चयन कर योजनाबद्ध ढंग से उत्पादन बढ़ाया जाए।
उन्होंने विशेष रूप से हरा चना के उत्पादन विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि इसकी आपूर्ति राज्य की सीमाओं से बाहर अन्य राज्यों तक सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसानों को व्यापक बाजार, बेहतर मूल्य और स्थिर आय मिल सके।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि के लिए उद्यानिकी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाना समय की माँग है। अब ध्यान केवल उत्पादकता पर नहीं, बल्कि लाभप्रदता पर केंद्रित होना चाहिए। जिला-वार विशिष्ट फसलों की पहचान, उच्च उपज वाले बीजों का व्यापक उपयोग, आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण और प्रभावी विपणन तंत्र के माध्यम से कृषि को अधिक मूल्यवान और लाभकारी बनाया जा सकता है।
आईसीआरआईईआर के प्रोफेसर पद्म श्री डॉ॰ अशोक गुलाटी ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने, उत्पादन बढ़ाने और निर्यात को गति देने के लिए मजबूत और संगठित वैल्यू चेन स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बिहार में पिछले वर्षों में कानून-व्यवस्था की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा सड़क आधारभूत संरचना में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है।
इन दोनों कारकों का बाजार से सीधा संबंध है, क्योंकि बेहतर सुरक्षा और परिवहन सुविधा से निवेश, व्यापार और कृषि विपणन को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसानों को वास्तविक लाभ अर्जित करना है तो उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर हाई वैल्यू एग्रीकल्चर की ओर कदम बढ़ाना होगा। बिहार में उपलब्ध सस्ता और प्रचुर श्रम उत्पादन तथा कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार के लिए बड़ी ताकत बन सकता है।
दक्षिणी बिहार के कम पानी वाले क्षेत्रों में दलहन फसलों को प्रोत्साहित किया जा सकता है, जबकि उत्तरी बिहार में गन्ने से इथेनॉल उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। साथ ही, लीची जैसे उत्पादों के प्रसंस्करण के बाद उनके प्रभावी प्रचार-प्रसार और ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार श्री नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि समय की माँग है कि किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाएं। नई तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए अब उद्यानिकी क्षेत्र की ओर निर्णायक कदम बढ़ाने की आवश्यकता है। फल, सब्जी और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों के विस्तार से आय के नए अवसर सृजित होंगे। यदि संगठित प्रयास किए जाएं तो उद्यानिकी के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
प्रिंसिपल साइंटिस्ट (ऑयलसीड और पल्स), क्रॉप साइंस डिवीजन, आई॰सी॰ए॰आर॰, हेडक्वार्टर डाॅ॰ संजीव कुमार झा ने कहा कि तेलहन और दलहन फसलों का विस्तार कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परिवर्तन का आधार बन सकता है। यह पहल फसल चक्र को सुदृढ़ करने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाने तथा खेती को अधिक टिकाऊ और संतुलित बनाने में सहायक होगी।
उन्होंने कहा कि इन फसलों के माध्यम से घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है, जिससे देश की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही, तिलहन एवं दलहन के उत्पादन विस्तार से पोषण सुरक्षा को बल मिलेगा और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।
डीडीजी (बागवानी विज्ञान), आई॰सी॰ए॰आर॰, श्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि फल एवं सब्जी क्षेत्र में अपार संभावनाएँ विद्यमान हैं, जिन्हें राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि फलों एवं सब्जियों के क्षेत्रफल विस्तार तथा विविधीकरण पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। कृषकों को संगठित कर किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से सुदृढ़ बाजार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित कर उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सकती है। डिजिटल कृषि-विपणन को अपनाना वर्तमान समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के विशेष सचिव द्वय डाॅ॰ बीरेन्द्र प्रसाद यादव एवं श्री शैलेन्द्र कुमार, कृषि निदेशक श्री सौरभ सुमन यादव, प्रबंध निदेशक, बि॰आर॰बी॰एन॰ श्री स्पर्श गुप्ता, उद्यान निदेशक श्री अभिषेक कुमार, अपर सचिव, श्रीमती कल्पना कुमारी सहित सभी प्रमंडलिय संयुक्त निदेशक (शष्य), सभी जिला कृषि पदाधिकारी, सभी जिला उद्यान पदाधिकारी एवं कृषि विभाग के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारीगण भी उपस्थित थे।
