- राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के क्षेत्रीय सम्मेलन में श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के सचिव दीपक आनन्द ने की शिरकत
- सम्मेलन में बिहार के अलावा ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
बीपी डेस्क। केंद्र सरकार के स्तर से 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर बनाई गई चार नई श्रम संहिताएं बिहार में 21 नवंबर 2025 से ही लागू हो गई हैं। वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यशर्त संहिता 2020 से बिहार के श्रमिकों को बेहतर वेतन, सुरक्षा और फिक्स्ड-टर्म रोजगार जैसे महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं। बिहार सरकार इनका लाभ शत-प्रतिशत श्रमिकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह जानकारी केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तत्वावधान में आईटीसी भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय “श्रम संहिता और अन्य पहलुओं पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चौथे क्षेत्रीय सम्मेलन” में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए बिहार सरकार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के सचिव दीपक आनन्द ने दी। सचिव ने इस मौके पर श्रण सुधारों से जुड़ी बातों की विस्तृत जानकारी दी। सम्मेलन में बिहार के अलावा ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के प्रतिनिधियों हिस्सा ले रहे हैं।
दीपक आनन्द ने कहा कि वेतन संहिता के तहत सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की गई है, जबकि सामाजिक सुरक्षा संहिता के माध्यम से गिग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पेंशन, बीमा और मातृत्व लाभ जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही, औद्योगिक संबंध संहिता ने उद्योगों के संचालन को सरल बना दिया है और महिलाओं के लिए रात की शिफ्ट में सुरक्षित कार्य की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि नई संहिताओं के तहत बिहार में सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे कार्य की सीमा निर्धारित की गई है तथा वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत मूलवेतन के रूप में निर्धारित करना अनिवार्य किया गया है, जिससे श्रमिकों के पीएफ और ग्रेच्युटी में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से राज्य के श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी। इस दौरान विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. गणेश कुमार झा भी उपस्थित रहे।
