- “किसान समृद्धि और आधुनिक कृषि के संकल्प के साथ 3446.45 करोड़ का बजट — बिहार कृषि विकास की नई उड़ान”
- “रिकॉर्ड उत्पादन से आत्मनिर्भर कृषि की ओर — 2026-27 में किसानों के लिए ऐतिहासिक बजटीय प्रावधान”
- “बीज से बाजार तक सशक्त किसान, तकनीक से समृद्ध बिहार — कृषि विभाग का दूरदर्शी बजट”
- कृषि निर्यात का हब बनेगा बिहार।
- युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने पर विशेष जोर, ए आई एवं डिजिटल राह पर बिहार की कृषि।
- किसान कल्याण, आधुनिक कृषि एवं सतत विकास को मिलेगी नई गति
बीपी डेस्क। आज बिहार विधानमंडल में कृषि विभाग का वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। बिहार विधान सभा में कृषि विभाग का बजट पारित होने के उपरांत कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने कहा कि स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय सहित विभागीय योजनाओं के संचालन हेतु 3446.45 करोड़ रुपये की बजट मांग सदन के समक्ष रखी गई थी, जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित किया। उन्होंने इसके लिए सदन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के मार्गदर्शन का परिणाम बताया।
मंत्री श्री यादव ने कहा कि बिहार में कृषि विकास की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए वर्ष 2008 से कृषि रोड मैप के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में चतुर्थ कृषि रोड मैप (2023-28) का सफल क्रियान्वयन जारी है। राज्य में मुख्य रूप से चावल, गेहूँ, मक्का, दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती की जाती है और पिछले वर्षों में उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2005 की तुलना में खाद्यान्न उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के अंतर्गत विकासात्मक एवं किसान हितैषी कार्यक्रमों को गति दी जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा 3272.83 करोड़ रुपये की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने हेतु सबौर (भागलपुर) में कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय तथा आरा (भोजपुर) में कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय की आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है।
साथ ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर एवं डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में दलहन, तिलहन एवं पोषक अनाज के अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभागीय सुदृढ़ीकरण के तहत प्रखंड उद्यान पदाधिकारी के 181 पदों पर नियुक्ति की गई है तथा पौधा संरक्षण से संबंधित 694 पदों के पुनर्गठन/सृजन की स्वीकृति दी गई है।
मंत्री श्री यादव ने कहा कि किसानों के अथक परिश्रम और सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है कि वर्ष 2024-25 में राज्य में अब तक का सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन हुआ है। अंतिम आकलन के अनुसार 326.62 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन दर्ज किया गया, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। बीज की उपलब्धता को कृषि विकास की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में स्वीट कॉर्न एवं बेबी कॉर्न को बढ़ावा देने हेतु 10,929 किसानों के बीच 178.16 क्विंटल बीज वितरित किया गया।
दलहनी फसलों के विस्तार हेतु 4,71,521 किसानों को 65,777 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया, जबकि मोटा अनाज उत्पादन बढ़ाने के लिए 75,701 किसानों के बीच 3,895.10 क्विंटल बीज वितरित किया गया।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में 300 लाख रुपये की लागत से 43 मखाना भंडारण संरचनाओं का निर्माण कराया गया है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य एवं सुरक्षित भंडारण की सुविधा प्राप्त होगी।
मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, इसलिए राज्य सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। बिहार राज्य जैविक मिशन के अंतर्गत सभी 38 जिलों में जैविक खेती प्रोत्साहन योजना संचालित की जा रही है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12.22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से “कृषि जन कल्याण चौपाल” कार्यक्रम राज्य की सभी पंचायतों में आयोजित किया गया, जिसके माध्यम से 8,47,798 किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया। अंत में मंत्री श्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक पेशा बनाना है, ताकि बिहार का किसान आत्मनिर्भर बने और राज्य कृषि विकास के नए मानक स्थापित करे।
